ब्रेकिंग
तमिलनाडु में सरकार गठन पर फिर फंसा पेंच: विजय के शपथ पर ग्रहण, VCK ने रख दी बड़ी शर्त; स्टालिन के साथ IUMLबिहार में डबल मर्डर से हड़कंप: एक ही घर के दो कमरों से देवरानी-जेठानी के शव बरामद, ससुरालवाले फरारअब किसे शाहजादा और युवराज बतायेंगे पीएम मोदी! तेजस्वी यादव ने सम्राट कैबिनेट के 17 मंत्रियों की लिस्ट जारी कर परिवारवादी बतायापश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कल, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी होंगे शामिलकौन हैं शुभेंदु अधिकारी जो बनने जा रहे हैं बंगाल के नए सीएम: जानिए उनका पूरा सियासी सफरतमिलनाडु में सरकार गठन पर फिर फंसा पेंच: विजय के शपथ पर ग्रहण, VCK ने रख दी बड़ी शर्त; स्टालिन के साथ IUMLबिहार में डबल मर्डर से हड़कंप: एक ही घर के दो कमरों से देवरानी-जेठानी के शव बरामद, ससुरालवाले फरारअब किसे शाहजादा और युवराज बतायेंगे पीएम मोदी! तेजस्वी यादव ने सम्राट कैबिनेट के 17 मंत्रियों की लिस्ट जारी कर परिवारवादी बतायापश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कल, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी होंगे शामिलकौन हैं शुभेंदु अधिकारी जो बनने जा रहे हैं बंगाल के नए सीएम: जानिए उनका पूरा सियासी सफर

BIHAR: नकली मुद्रा मामले में मनीष कुमार सिंह दोषी करार, विशेष एटीएस न्यायालय ने सुनाई 6 साल की सजा

पटना की एटीएस अदालत ने नकली मुद्रा मामले में मनीष कुमार सिंह को दोषी मानते हुए 6 वर्ष की कैद और ₹4000 जुर्माने की सजा सुनाई।

Bihar
ATS स्पेशल कोर्ट का फैसला
© GOOGLE
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

PATNA: आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की विशेष न्यायालय ने नकली मुद्रा और आतंकवाद से संबंधित आपराधिक पर सुनवाई करते हुए आरोपी मनीष कुमार सिंह को सजा सुनाई। भारतीय दंड संहिता की धारा 489(B) के तहत 6 साल कारावास और धारा 489 (C) के तहत 3 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गयी। साथ ही 4 हजार रूपया आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया। 


आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), बिहार, पटना द्वारा दर्ज थाना कांड संख्या 03/2015 में विचारोपरांत अभियुक्त मनीष कुमार सिंह को माननीय विशेष न्यायालय (एटीएस), पटना ने दोषी करार दिया। दिनांक 01 अगस्त 2025 को दोष सिद्ध होने के बाद आज, दिनांक 04 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सजा सुनाई।


कोर्ट ने यह फैसला नकली मुद्रा (FICN) और आतंकवाद से संबंधित आपराधिक गतिविधियों के विरुद्ध कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सतर्कता और न्यायपालिका की संवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह सख्त कार्रवाई समाज में असामाजिक तत्वों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश भी है कि ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


संबंधित खबरें