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ISM पटना में व्याख्यान का आयोजन: इसके माध्यम से युवाओं को मिला लैंगिक संवेदनशीलता का संदेश

आईएसएम पटना में स्व. तर्केश्वर सिंह की स्मृति में आयोजित व्याख्यान में युवाओं को लैंगिक संवेदनशीलता और सामाजिक समावेशिता की प्रेरणा दी गई। प्रो. शेफाली राय ने छात्रों को रूढ़ियों को तोड़ने का आह्वान किया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Aug 13, 2025, 7:04:20 PM

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दृष्टि को स्मरण, स्वर को आकार - फ़ोटो SOCIAL MEDIA

PATNA: ISM पटना में "लैंगिक संवेदनशीलता: युवा दृष्टिकोण"विषयक स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से युवाओं को लैंगिक संवेदनशीलता का संदेश दिया गया।आईएसएम, पटना के पूज्य मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत, स्वर्गीय तर्केश्वर सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर परिसर में स्मरण सह संकल्प का अनूठा संगम देखने को मिला। 


इस अवसर पर जेंडर सेंसिटाईजेशन सेल और सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में "लैंगिक संवेदनशीलता: युवा दृष्टिकोण"विषयक स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों के रूप में आईएसएम, पटना के अध्यक्ष एवं स्व. तर्केश्वर सिंह के अनुज, श्री समरेन्द्र सिंह, वाईस चेयरमैन, श्री देवल सिंह तथा सचिव श्री अमल सिंह उपस्थित रहे। इनकी उपस्थिति ने संस्थान की मूल्यों और विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को और सशक्त किया।


मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) शेफाली राय, निदेशक, लोक प्रशासन संस्थान, पटना विश्वविद्यालय ने अपने प्रभावशाली और विचारोत्तेजक संबोधन में लैंगिक संवेदनशीलता और युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी के अंतर्संबंधों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा, “परिवर्तन व्यक्तिगत जागरूकता से शुरू होता है, लेकिन सामाजिक मान्यताओं को बदलने के लिए सामूहिक साहस जरूरी है।” डॉ. राय ने युवाओं से आह्वान किया कि वे रूढ़िवादिता पर प्रश्न उठाएं, निष्पक्षता की पैरवी करें और विचार व व्यवहार, दोनों में समावेशिता अपनाएं।


कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय, आईएसएम, पटना की अकादमिक हेड डॉ. स्वेता रानी ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. रानी ने कहा, “स्व. तर्केश्वर सिंह मानते थे कि शिक्षा केवल बुद्धि नहीं, बल्कि अंत:करण को भी जागृत करे। आज की चर्चा उनके इसी दृष्टिकोण को समर्पित है, वास्तविक शिक्षा हमें पूर्वाग्रहों को तोड़ने और समानता का पक्षधर बनने की ताकत देती है।”


जेंडर सेंसिटाइजिंग सेल की संयोजक, श्रीमती नीरू कुमारी ने सभी स्नातक विद्यार्थियों की उत्साही भागीदारी के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल स्मरण मात्र नहीं, बल्कि प्रगतिशील सामाजिक परिवर्तन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का पुनःप्रत्यय है।


स्मृति व्याख्यान का समापन इस साझा विचार के साथ हुआ कि किसी महान मार्गदर्शक की स्मृति को सम्मानित करने का अर्थ केवल उनके शब्दों को याद रखना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना है। आईएसएम, पटना के विद्यार्थियों के लिए यह अपराह्न् अतीत को नमन और भविष्य के लिए प्रेरणादायक आह्वान, दोनों का प्रतीक बन गई।