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Bihar News: बिहार के 18 नगर निगमों में बनेंगे नए जोन, लिस्ट में शामिल हैं ये जिले..

Bihar News: बिहार के 18 नगर निगमों में पटना मॉडल पर बनेंगे नए जोन। नगर विकास और आवास विभाग ने नालंदा, भोजपुर, रोहतास, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर समेत 18 जिलों के डीएम को अंचल गठन का प्रस्ताव तैयार करने का दिया निर्देश..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार में शहरी विकास को गति देने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 18 नगर निगमों में पटना नगर निगम की तर्ज पर अलग-अलग अंचल बनाए जाएंगे। इसके लिए विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने नालंदा, भोजपुर, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुंगेर, गया, पूर्णिया, कटिहार, सारण, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर और सहरसा के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर अंचल गठन का प्रस्ताव तैयार करने और जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।


विभाग के अनुसार, बड़े क्षेत्रफल वाले नगर निगमों में नगर आयुक्त सभी वार्डों में चल रही विकास योजनाओं की निगरानी और कार्यों का निरीक्षण करने में असमर्थ रहते हैं। इससे योजनाओं की गुणवत्ता और कार्य की गति प्रभावित होती है। अंचल गठन के जरिए प्रशासनिक विकेंद्रीकरण किया जाएगा, जिससे प्रत्येक जोन में अलग-अलग अधिकारियों की तैनाती होगी। इससे योजनाओं की मॉनिटरिंग और कार्यान्वयन में सुधार होगा, साथ ही भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।


कैसे होगा काम?

अंचलों की संख्या: प्रत्येक नगर निगम में अंचलों की संख्या वहां की आबादी और क्षेत्रफल के आधार पर तय की जाएगी।  

प्रशासनिक ढांचा: हर अंचल में एक कार्यपालक अभियंता, अभियंता और अन्य प्रशासनिक अधिकारी तैनात होंगे जो अपने क्षेत्र की योजनाओं की निगरानी करेंगे।  

नगर आयुक्त की भूमिका: नगर आयुक्त इन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर पूरे नगर निगम के कार्यों पर नजर रख सकेंगे।  

पटना मॉडल: वर्तमान में पटना नगर निगम में छह अंचल हैं जो प्रभावी मॉनिटरिंग का उदाहरण हैं। इस मॉडल को अब अन्य 18 नगर निगमों में भी लागू किया जाएगा।


नए जोन के गठन से न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी बल्कि नागरिकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और समस्याओं के समाधान में भी आसानी होगी। इससे योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से प्रशासनिक खर्च बढ़ सकता है और राजनीतिक दखलअंदाजी की आशंका भी बनी रहेगी। फिर भी, यह कदम बिहार के शहरी प्रशासन को मजबूत करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा ही महत्वपूर्ण है।

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