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मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना: 909 नए पुलों से जुड़ेंगे बिहार के गांव, बदलेगी गांव की तस्वीर

बिहार सरकार मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत 38 जिलों में 909 पुलों का निर्माण कर रही है। 670 पुलों का काम शुरू हो चुका है, जबकि 239 के लिए निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

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बिहार के गांव अब मंडी से जुड़ेंगे
© social media
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत 909 नए पुलों से बिहार के गांव जुड़ेंगे। जिससे गांव की तस्वीर बदलेगी। 670 पुलों का कार्य आवंटन आदेश जारी किया गया है। शेष 239 पुलों के निर्माण के लिए निविदा निष्पादन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए राज्य सरकार ने 4 हजार 744 लाख 64 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने की स्वीकृति प्रदान की है।


जब गांव सड़कों से जुड़ती है, तो पूरे गांव की तस्वीर बदल जाती है। यह सड़कें किसानों को खेत से मंडी तक सीधे संपर्कता प्रदान करते हैं। इससे उनके व्यवसाय की तरक्करी का मार्ग प्रशस्त होता है। छात्र-छात्राओं को घर से स्कूल एवं कॉलेज तक तथा सरकारी सुविधाओं और सेवाओं के गांव तक ससमय पहुंचने से ग्रामीण जीवन सहज और आसान हो जाता है। साथ ही गांवों में विकास और अवसर के नए द्वार भी खुलते हैं। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर बिहार सरकार ने सितंबर, 2024 ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध सम्पर्कता के लिए छूटे हुए जनोपयोगी पुल, सड़क और पहुंच पथ के निर्माण और अनुरक्षण हेतु मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में कुल 909 पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने 4 हजार 744 लाख 64 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने की स्वीकृति प्रदान की है।


बिहार के गांव अब मंडी से जुड़ेंगे

इनमें कुल 670 पुलों का कार्य आवंटन आदेश जारी किया जा चुका है और इन पुलों का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शेष 239 पुलों के निर्माण के लिए निविदा निष्पादन की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। इस योजना के तहत पूर्व से निर्मित कई जर्जर पुलों की जगह नए पुलों का निर्माण, पूर्व से निर्मित पुलों के पहुंच पथ में छूटे हुए पुल, बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुलों की जगह नए पुलों का निर्माण, निर्मित पुलों के लिए पहुंच पथ का निर्माण, अबतक बिना संपर्क वाले बचे हुए टोलों और बसावटों को संपर्कता प्रदान करने के लिए पुल-पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। 


ग्रामीण कार्य विभाग ने बनाई तकनीकी टीम

ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार स्वीकृत और एकरारित पुलों के डीपीआर की समीक्षा और सुधार के लिए तीन विभागीय तकनीकी परामर्शी और एक पुल सलाहकार के साथ कुल 10 सहायक अभियंताओं को प्रतिनियुक्त किया गया है। इनके माध्यम से निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार वृहद स्तर पर डीपीआर की गहन जांच की जा रही है ताकि भविष्य में कोई विसंगति न हो। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार तैयार की गई एसओपी में प्रतिदिन 20 डीपीआर की समीक्षा की जा रही है। आगामी 10 फ़रवरी तक सभी डीपीआर की समीक्षा का कार्य पूर्ण कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इतना ही नहीं इन सभी डीपीआर की समीक्षा के बाद उसमें सुधार के लिए भी 17 फ़रवरी की तारीख निर्धारित कर दी गई है। यदि किसी डीपीआर में बड़े बदलाव या सुधार की जरुरत हो तो उसके लिए भी 25 फ़रवरी की तिथि निर्धारित कर दी गई है।


योजना के तहत पूर्वी चंपारण में बनेंगे सबसे अधिक 76 पुल

मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत सबसे अधिक 76 पुलों का निर्माण पूर्वी चंपारण जिले में किया जाएगा। जबकि, दरभंगा में 53, सीतामढ़ी में 43, मधुबनी में 42, शेखपुरा में 39, गयाजी में 38, भागलपुर, नालंदा एवं वैशाली में क्रमानुसार 34-34 सारण और गोपालगंज में 31-31, सिवान में 30, समस्तीपुर में 29, रोहतास में 27, पूर्णिया में 24 तथा सुपौल एवं बेगूसराय में 23-23 पुलों का निर्माण किया जा रहा है। राजधानी पटना में भी कुल 18 पुलों का निर्माण किया जाएगा।

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