ब्रेकिंग
MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की सदस्यता रद्द करने की मांग, RJD ने सभापति को सौंपा ज्ञापन✦Bihar Ration Card : अब राशन दुकानों पर AI की नजर! 60 हजार PDS दुकानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार, फर्जी कार्ड और कालाबाजारी पर लगेगी लगाम✦ छठ से पहले प्रशासन का बड़ा एक्शन! KFC-डोमिनोज समेत कई दुकानों पर छापेमारी, गड़बड़ी मिलने पर लगा जुर्माना✦ IG से भिड़ने वाली महिला DSP को बड़ी राहत...सरकार ने दी क्लिनचिट, हाईकोर्ट के आदेश पर दुबारा पक्ष सुना गया, इसके बाद आरोप से किया गया मुक्त ✦बिहार TRE-4 में नौकरी की महाभारत! 33 हजार पदों के लिए 9.95 लाख युवाओं ने ठोकी दावेदारी, एक सीट पर 30 की टक्कर!✦MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की सदस्यता रद्द करने की मांग, RJD ने सभापति को सौंपा ज्ञापन✦Bihar Ration Card : अब राशन दुकानों पर AI की नजर! 60 हजार PDS दुकानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार, फर्जी कार्ड और कालाबाजारी पर लगेगी लगाम✦ छठ से पहले प्रशासन का बड़ा एक्शन! KFC-डोमिनोज समेत कई दुकानों पर छापेमारी, गड़बड़ी मिलने पर लगा जुर्माना✦ IG से भिड़ने वाली महिला DSP को बड़ी राहत...सरकार ने दी क्लिनचिट, हाईकोर्ट के आदेश पर दुबारा पक्ष सुना गया, इसके बाद आरोप से किया गया मुक्त ✦बिहार TRE-4 में नौकरी की महाभारत! 33 हजार पदों के लिए 9.95 लाख युवाओं ने ठोकी दावेदारी, एक सीट पर 30 की टक्कर!

'किसी भी वर्ग में उपेक्षा लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं', UGC बिल को लेकर मचे बवाल पर JDU ने स्टैंड क्लियर किया

UGC Bill 2026: यूजीसी बिल 2026 और नई गाइडलाइंस को लेकर जेडीयू का रुख सामने आया है. जेडीयू प्रवक्ता ने कहा है कि जाति आधारित भेदभाव के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है और इसपर कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होगा.

UGC Bill 2026
किसी भी वर्ग में उपेक्षा ठीक नहीं
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

UGC Bill 2026: यूजीसी बिल 2026 को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का रुख सामने आया है। पार्टी के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस देश को संविधान दिया है, जिसमें हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में समाज के किसी भी वर्ग में उपेक्षा या नाराजगी की भावना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।


नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार “न्याय के साथ सबका विकास और सबका सम्मान” के सिद्धांत के रोल मॉडल हैं। यूजीसी के नए रेगुलेशन को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं और अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है। न्यायपालिका का सभी सम्मान करते हैं, इसलिए अब इस मामले में न्यायपालिका का फैसला ही सर्वमान्य और महत्वपूर्ण होगा।


वहीं, यूजीसी की नई गाइडलाइंस ने उत्तर प्रदेश में सियासी पारा बढ़ा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारियों ने इसके विरोध में इस्तीफा तक दे दिया है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि जाति आधारित भेदभाव की एक गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और संस्थागत सुरक्षा से कुछ वर्गों को बाहर कर दिया गया है।


याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मौजूदा स्वरूप में इन गाइडलाइंस को लागू करने पर रोक लगाई जाए और जाति आधारित भेदभाव को “जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप” तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए। इसमें कहा गया है कि जाति के आधार पर भेदभाव की परिभाषा ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी जाति की पहचान वाले सभी पीड़ितों को समान सुरक्षा मिल सके।


साथ ही याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन नियमों के तहत बनाए गए ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ जैसी सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए उपलब्ध हों।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता