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Bihar Land Survey: बिहार में यह क्या हो रहा..? अधिग्रहित-हस्तांतरित -बंदोबस्त भूमि का भी नहीं हो रहा दाखिल-खारिज, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कमिश्नर-DM से क्या कहा....

Bihar Land Survey: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलों के डीएम को पत्र लिखा है. निदेशक, चकबंदी द्वारा लिखे गए पत्र में रैयतों से अधिग्रहित भूमि या हस्तांतरित भूमि का दाखिल खारिज नहीं होने पर चिंता जताई गई है.

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Viveka Nand
3 मिनट

Bihar Land Survey: बिहार सरकार ने जिस जमीन का अधिग्रहण किया, उसका भी दाखिल खारिज नहीं हो रहा. सरकार के स्तर से विभिन्न योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहित की जाती है, लेकिन उस भूमि का न तो दाखिल खारिज हो रहा और न जमाबंदी कायम किया जा रहा. अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है.

निदेशक चकबंदी ने लिखा पत्र

निदेशक, चकबंदी राकेश कुमार की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है, ''सरकारी कार्य के लिए अधिग्रहित भूमि का दाखिल खारिज एवं जमाबंदी सृजन करने की जरूरत है.'' राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कहा है कि विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए विभिन्न स्तरों पर हस्तांतरित या बंदोबस्त सरकारी भूमि तथा अधिग्रहित रैयती भूमि का जमाबंदी कायम करने में कठिनाई आ रही है. इसे दूर करने के लिए संबंधित विभाग, उपक्रम, निकाय के नाम से दाखिल खारिज तथा जमाबंदी कायम करने के लिए विभाग के स्तर से ऑनलाइन व्यवस्था की गई है .

दाखिल खारिज के सिर्फ 1250 मामले दायर हुए...निपटारा सिर्फ 1 का हुआ

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 20 मई 2024 को दाखिल खारिज के क्रियान्वयन ससमय करने के लिए सीमा निर्धारित की थी. 30 जून 2024 तक यह काम कर लेना था. लेकिन समय बीतने के बाद भी कार्य नहीं किए जा सके. विभिन्न विभागों, उपक्रमों, निकायों को हस्तांतरित बंदोबस्त, अधिग्रहित भूमि के दाखिल खारिज के मामले की विभाग के स्तर पर समीक्षा की गई. जिसमें पाया गया है कि राज्य में 37 जिलों से दाखिल खारिज के 1250 मामले सामने आए हैं. जिसमें सिर्फ एक मामले का निष्पादन किया गया है. शेष सभी मामले लंबित हैं. जिलों के द्वारा जो भी मामले दाखिल खारिज के लिए दायर किए गए हैं, उसकी समीक्षा में यह बात स्पष्ट हो रही है कि जिला स्तर पर ऐसे मामलों की जांच एवं छानबीन नहीं की गई. 

पटना से सिर्फ 28 मामले आये..जबकि संख्या काफी अधिक

राजस्व विभाग ने उदाहरण के तौर पर बताया है कि पटना जिले से सिर्फ 28 मामले प्रतिवेदन किए गए,जबकि इस जिले के अंतर्गत भू हस्तांतरण, बंदोबस्ती, भू अधिग्रहण की कार्रवाई बड़े पैमाने पर की गई है. जिनकी संख्या काफी अधिक हो सकती है . चकबंदी निदेशक ने अपने पत्र में प्रमंडलीय आयुक्त और सभी जिलों के जिलाधिकारियों से कहा है कि ऐसे में लोक प्रयोजन के लिए हस्तांतरित भूमि, बंदोबस्त भूमि या अधिग्रहित भूमि का दाखिल खारिज एवं जमाबंदी सृजन के बिंदु पर जिला स्तर पर गहन जांच करें, एवं समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई करें.

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता

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