Inland Water Transport: बिहार में अंतर्देशीय जल परिवहन को मिलेगा बड़ा विस्तार, गंगा की तरह विकसित होंगे ये राष्ट्रीय जलमार्ग

Inland Water Transport: बिहार में गंगा और अन्य छह राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास होगा. नई जेटियां और मल्टीमॉडल टर्मिनल के निर्माण से कार्गो और पर्यटन में तेजी आएगी. इसके साथ ही साथ रोजगार के नौकरियों के अवसर मिलेंगे.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Fri, 30 Jan 2026 09:14:22 PM IST

Inland Water Transport

प्रतिकात्मक - फ़ोटो AI

Inland Water Transport: राज्य सरकार गंगा के बाद अब सभी छह घोषित राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास करेगी। राज्य में कुल सात राष्ट्रीय जलमार्ग हैं एनडब्ल्यू-1 (गंगा), एनडब्ल्यू-37 (गंडक), एनडब्ल्यू-58 (कोसी), एनडब्ल्यू-40 (घाघरा), एनडब्ल्यू-54 (कर्मनाशा), एनडब्ल्यू-81 (पुनपुन) और एनडब्ल्यू-94 (सोन)। इनकी कुल लंबाई 1187 किलोमीटर है।


परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने आईडब्ल्यूएआई के निदेशक को विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने गुरुवार को पटना में जल परिवहन अवसंरचना की प्रगति समीक्षा बैठक की, जिसमें राज्य परिवहन आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


मंत्री ने कहा कि घाटों का धार्मिक और व्यावसायिक महत्व के अनुसार विकास किया जाएगा। वर्तमान में 17 नए सामुदायिक जेटियों का निर्माण चल रहा है। 21 पुराने जेटियों को जल्द ही राजस्व विभाग से हस्तांतरित किया जाएगा।


निर्माण में लंबित एनओसी को लेकर मंत्री ने जिलाधिकारियों से तुरंत कार्रवाई करने को कहा। नई जेटियां नदी आधारित यातायात, स्थानीय व्यापार और पर्यटन को सुगम बनाएंगी। सिमरिया, अयोध्या, चित्रोर, एनआईटी, कोनहारा, सोनपुर हरिहरनाथ मंदिर, कहलगांव, खवासपुर, कंगन, पत्थर घाट और ग्यासपुर पीपापुल पर निर्माण जारी है।


पटना के गायघाट पर हाई-लो लेवल जेटी और गोदाम विकसित किए गए हैं। सोनपुर के कालुघाट पर मल्टीमॉडल टर्मिनल तैयार है, जहां दो मालवाहक जहाज एक साथ खड़े हो सकते हैं। बक्सर, कच्ची दरगाह/दीघा, राघोपुर दियारा, बाढ़, अगुआनी, सुल्तानगंज, कहलगांव और बटेश्वर नाथ पर ऑनशोर सुविधाओं का निर्माण भी जारी है।


मंत्री ने बताया कि गंगा मार्ग से कार्गो ढुलाई में तेजी आई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 0.83 लाख टन माल ढुलाई हुई थी, जबकि 2025-26 में अब तक 12.22 लाख टन से अधिक माल पहुंचाया जा चुका है। इसमें खाद्य तेल, सीमेंट, बलुआ पत्थर, उर्वरक, कोयला, चावल और पशु आहार शामिल हैं। क्रूज शिप से पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है।