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पाटेश्वरी देवी मंदिर आस्था और अध्यात्म का केंद्र, मां सती को समर्पित है ये टेंपल

सनातन धर्म में 51 शक्तिपीठों का विशेष महत्व है, जहां मां सती के अंग या आभूषण गिरे थे। इन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित पाटेश्वरी देवी मंदिर।

Pateshwari Devi

25-Feb-2025 08:07 AM

By First Bihar

सनातन धर्म में मां सती के 51 शक्तिपीठों को विशेष दर्जा दिया गया है। ये शक्तिपीठ अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं और प्रत्येक का अपना विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इन्हीं शक्तिपीठों में से एक उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित पाटेश्वरी देवी मंदिर है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है।


मंदिर की धार्मिक मान्यता

पुराणों के अनुसार, जिस स्थान पर पाटेश्वरी देवी मंदिर स्थित है, वहां मां सती का बायां कंधा और पट (वस्त्र) गिरा था। इसी कारण इस मंदिर को अत्यंत पावन और शक्तिशाली माना जाता है। मंदिर में मां पाटेश्वरी देवी की प्रतिमा विराजमान है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।


विशेष पूजा और नवरात्रि महत्त्व

नवरात्र के दौरान इस मंदिर में मां पाटेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं और मां की पिंडी के पास चावल की ढेरी बनाकर उपासना करते हैं। बाद में यह चावल प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां पाटेश्वरी की सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।


अखंड धूनी: त्रेता युग से जल रही है ज्योति


पाटेश्वरी देवी के मंदिर में अखंड धूनी जलती आ रही है। पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेता युग में गुरु गोरक्षनाथ जी महाराज ने मां पाटेश्वरी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी दौरान उन्होंने एक धूनी प्रज्वलित की थी, जो आज भी निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इस पवित्र धूनी की राख को अपने घर ले जाते हैं, जिससे उनके जीवन के सभी तरह के कष्ट दूर होने की मान्यता है।


सूर्य कुण्ड का महत्व


मंदिर प्रांगण में स्थित सूर्य कुण्ड का भी विशेष धार्मिक महत्व है। कहा जाता है कि महाभारत काल में कर्ण ने इसी स्थान पर स्नान किया था और सूर्यदेव को जल अर्पित किया था। इसीलिए इसे सूर्य कुण्ड कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान करने से श्रद्धालुओं के चर्म रोग दूर हो जाते हैं और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।


श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र


मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। यहां आने वाले भक्त मां के दर्शन कर मानसिक शांति का अनुभव करते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।


पाटेश्वरी देवी मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यदि आप भी मां पाटेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस पावन स्थल की यात्रा अवश्य करें।

सनातन धर्म में मां सती के 51 शक्तिपीठों को विशेष दर्जा दिया गया है। ये शक्तिपीठ अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं और प्रत्येक का अपना विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इन्हीं शक्तिपीठों में से एक उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित पाटेश्वरी देवी मंदिर है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है।


मंदिर की धार्मिक मान्यता

पुराणों के अनुसार, जिस स्थान पर पाटेश्वरी देवी मंदिर स्थित है, वहां मां सती का बायां कंधा और पट (वस्त्र) गिरा था। इसी कारण इस मंदिर को अत्यंत पावन और शक्तिशाली माना जाता है। मंदिर में मां पाटेश्वरी देवी की प्रतिमा विराजमान है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।


विशेष पूजा और नवरात्रि महत्त्व

नवरात्र के दौरान इस मंदिर में मां पाटेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं और मां की पिंडी के पास चावल की ढेरी बनाकर उपासना करते हैं। बाद में यह चावल प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां पाटेश्वरी की सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।


अखंड धूनी: त्रेता युग से जल रही है ज्योति


पाटेश्वरी देवी के मंदिर में अखंड धूनी जलती आ रही है। पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेता युग में गुरु गोरक्षनाथ जी महाराज ने मां पाटेश्वरी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी दौरान उन्होंने एक धूनी प्रज्वलित की थी, जो आज भी निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इस पवित्र धूनी की राख को अपने घर ले जाते हैं, जिससे उनके जीवन के सभी तरह के कष्ट दूर होने की मान्यता है।


सूर्य कुण्ड का महत्व


मंदिर प्रांगण में स्थित सूर्य कुण्ड का भी विशेष धार्मिक महत्व है। कहा जाता है कि महाभारत काल में कर्ण ने इसी स्थान पर स्नान किया था और सूर्यदेव को जल अर्पित किया था। इसीलिए इसे सूर्य कुण्ड कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान करने से श्रद्धालुओं के चर्म रोग दूर हो जाते हैं और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।


श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र


मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। यहां आने वाले भक्त मां के दर्शन कर मानसिक शांति का अनुभव करते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।


पाटेश्वरी देवी मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यदि आप भी मां पाटेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस पावन स्थल की यात्रा अवश्य करें।