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Sheikh Hasina : मानवता-विरोधी अपराधों में दोषी शेख हसीना को मौत की सजा, बांग्लादेश में हालात तनावपूर्ण; जानिए क्या है वजह

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल ने मानवता-विरोधी अपराधों में दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई, जिसके बाद देशभर में तनाव और सुरक्षा अलर्ट बढ़ गया है।

 Sheikh Hasina :  मानवता-विरोधी अपराधों में दोषी शेख हसीना को मौत की सजा, बांग्लादेश में हालात तनावपूर्ण; जानिए क्या है वजह

17-Nov-2025 02:26 PM

By First Bihar

Sheikh Hasina :  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चल रहे मानवता-विरोधी कथित अपराधों के सबसे बड़े और चर्चित मामले में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (ICT-BD) ने ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई, जिसके बाद कोर्टरूम में मौजूद लोगों की ओर से तालियां भी बजाई गईं। फैसले को लेकर पूरे देश में तनाव की स्थिति है और ढाका में सुरक्षा एजेंसियों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है।


400 पेज का फैसला, छह हिस्सों में पढ़ा गया

तीन सदस्यीय पीठ, जिसकी अगुवाई जस्टिस गुलाम मुर्तजा कर रहे हैं, सुबह से फैसले की प्रति को छह हिस्सों में पढ़ रही थी। लगभग 400 पन्नों के इस फैसले में 2024–25 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, मौतों, ड्रोन और घातक हथियारों के कथित उपयोग सहित कई घटनाओं का विस्तृत उल्लेख मौजूद है। अदालत ने कहा कि उसने 10,000 पन्नों के दस्तावेजी सबूत, 80 से अधिक गवाहों की गवाही और अनेक वीडियो-ऑडियो सामग्री का परीक्षण किया है।


पीठ ने अपने निष्कर्ष में कहा कि शेख हसीना की भूमिका “आदेश देने, हिंसा रोकने में विफल रहने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन की अनुमति देने" जैसी परिस्थितियों में साबित होती है। कोर्ट के मुताबिक यह सब “मानवता के खिलाफ अपराध” की परिभाषा में आता है।


दो मुख्य आरोप साबित


आरोप संख्या 1:

अदालत के अनुसार हसीना ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर उकसाने वाले आदेश दिए। इसके साथ ही उन्होंने उन सरकारी अधिकारियों और बलों पर नियंत्रण नहीं रखा, जिन्होंने अत्यधिक बल प्रयोग किया। अदालत ने इसे मानवता-विरोधी अपराध माना।


आरोप संख्या 2:

ट्राइब्यूनल ने पाया कि हसीना ने ड्रोन, हेलिकॉप्टर और अन्य घातक हथियारों के इस्तेमाल को मंजूरी दी। गवाही में कई अधिकारियों ने बताया कि कुछ अभियानों का नेतृत्व शीर्ष स्तर से निर्देशित था। कोर्ट ने इसे भी मानवता-विरोधी अपराध घोषित करते हुए दोष सिद्ध किया।


अदालत में अनुपस्थित रहीं हसीना, ‘भगोड़ा’ घोषित

फैसला हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान की अनुपस्थिति में सुनाया गया। दोनों को पहले ही ‘फरार’ घोषित किया जा चुका है। अदालत ने कहा कि दोष सिद्ध होने के बाद अधिकतम सजा के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अभियोजक गाजी MH तमीम ने अदालत में कहा कि हसीना की संपत्तियों को भी जब्त किया जाए और उन्हें पिछले वर्ष के प्रदर्शनों में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों के बीच वितरित किया जाए।


ढाका में कर्फ्यू जैसा माहौल, पुलिस को ‘देखते ही गोली’ का आदेश

फैसले से पहले ही ढाका में हालात बेहद तनावपूर्ण थे। पिछले एक सप्ताह में शहर में 40 से अधिक आगजनी और कई बम धमाकों की घटनाएं हो चुकी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों को आदेश दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति आगजनी या विस्फोट की कोशिश करता दिखे तो गोली चलाने में संकोच न करें। राजधानी के कई हिस्सों में दुकानें और बाजार बंद हैं। सड़कों पर सैन्य वाहनों की गश्त और बैरिकेडिंग सामान्य दृश्य बन चुके हैं।


हसीना का संदेश—‘जो चाहे फैसला दे दें, परवाह नहीं’

फैसले से ठीक पहले एक ऑडियो संदेश में शेख हसीना ने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और यह सब राजनीतिक बदले की कार्रवाई का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें निशाना इसलिए बनाया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हमेशा "कट्टरपंथी ताकतों" के खिलाफ आवाज उठाई। अपने समर्थकों को भेजे संदेश में उन्होंने कहा—“वो लोग जो फैसला देना चाहते हैं दे दें, मुझे इसकी परवाह नहीं।”


अब आगे क्या? अपील तभी संभव जब…

बांग्लादेशी कानून के अनुसार, शेख हसीना उच्चतम न्यायालय में अपील तभी कर सकती हैं जब वे 30 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करें, या उन्हें गिरफ्तार किया जाए। फिलहाल हसीना देश से बाहर हैं और सुरक्षा एजेंसियों को उनके ठिकाने की आधिकारिक जानकारी नहीं है।


इस फैसले से बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। जहाँ विपक्षी दलों ने फैसले का स्वागत किया है, वहीं हसीना की पार्टी अवामी लीग इसे ‘न्यायिक हत्या’ बता रही है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस फैसले को चुनौती देंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ट्रायल की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।