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Bihar Politcis: नीतिश कैबिनेट में कौन हैं कितने पढ़े-लिखें, इनके पास हैं सबसे अधिक डिग्रीयां?

Bihar Politcis: बिहार में नई सरकार का गठन औपचारिक रूप से पूरा हो गया है। गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों ने पद और गोपनीयता की शपथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ली।

Bihar Politcis

21-Nov-2025 11:29 AM

By First Bihar

Bihar Politcis: बिहार में नई सरकार का गठन औपचारिक रूप से पूरा हो गया है। गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों ने पद और गोपनीयता की शपथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ली। यह शपथ ग्रहण समारोह बिहार के राजनीतिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि नए मंत्रिमंडल में शिक्षा और अनुभव का संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है।


नई मंत्रिपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या 27 है, जिनमें एक को छोड़कर सभी के पास कम से कम बारहवीं से लेकर इंजीनियरिंग डिग्री तक की योग्यता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब एनआईटी पटना) से विद्युत इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की है, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बेगूसराय पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। वहीं, दीपक प्रकाश ने मणिपाल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री प्राप्त की है।


मंत्रिपरिषद में केवल एक मंत्री, नारायण प्रसाद, बेतिया से 1972 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण हैं। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त है। मंत्रिपरिषद में चार मंत्री उच्च शिक्षा के तहत पीएचडी धारक हैं। इनमें दिलीप कुमार जायसवाल ने बीएनएम विश्वविद्यालय, मधेपुरा से पीएचडी की है, जबकि अशोक चौधरी, संतोष कुमार सुमन और डॉ. प्रमोद कुमार ने भी पीएचडी पूरी की है।


शिक्षा के स्तर के अनुसार मंत्रिपरिषद में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले चार मंत्री हैं। इनमें विजय कुमार चौधरी, सुनील कुमार, अरुण शंकर प्रसाद और श्रेयसी सिंह शामिल हैं। वहीं, स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त सात मंत्री हैं, जिनमें मंगल पांडेय, मदन सहनी, रामकृपाल यादव, संजय सिंह टाइगर, लखेंद्र कुमार रौशन, संजय कुमार और संजय कुमार सिंह शामिल हैं। यह दिखाता है कि नई सरकार में शिक्षा का व्यापक प्रतिनिधित्व है।


इसके अलावा, राज्य मंत्रिपरिषद में सात मंत्री ऐसी हैं जिनकी शिक्षा 12वीं तक है। इनमें बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, नितिन नवीन, जमा खान, सुरेंद्र मेहता और रमा निषाद शामिल हैं। इनमें रमा निषाद पहली बार विधायक बनी हैं और उन्हें मंत्री पद भी मिला है, जबकि बाकी छह मंत्री पहले भी राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। यह अनुभव नए मंत्रिमंडल के कामकाज में एक स्थिरता और प्रशासनिक दक्षता प्रदान करेगा।


नई सरकार ने शपथ ग्रहण के साथ ही अपने एजेंडा का संकेत भी दे दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंत्रिमंडल में तकनीकी और प्रबंधन दक्षता का संतुलन है, जो बिहार में विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को गति देगा। इंजीनियरिंग और विज्ञान में डिग्रीधारी मंत्रियों की संख्या अधिक होने के कारण उम्मीद है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया पहल और औद्योगिक विकास परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार के विकास के लिए नई सरकार का योगदान महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने मंत्रियों को यह भी याद दिलाया कि लोकहित और विकास कार्य ही प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी भाषण में कहा कि उनकी सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बाढ़ प्रबंधन को मुख्य एजेंडा बनाएगी।


इस मंत्रिमंडल में अनुभव और युवाओं का मिश्रण है। ऐसे मंत्रियों की संख्या भी है जिन्होंने पहले कई बार शासन का अनुभव प्राप्त किया है, जिससे नई नीतियों को लागू करने में आसानी होगी। दूसरी ओर, नए चेहरे और पहली बार मंत्री बने विधायक यह सुनिश्चित करेंगे कि नए दृष्टिकोण और नवीन विचार भी मंत्रिमंडल में शामिल हों।


शिक्षा और अनुभव के इस संतुलन के साथ ही मंत्रिमंडल का गठन बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में नई ऊर्जा और स्थिरता लेकर आएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मंत्रिपरिषद के तहत राज्य में इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार और डिजिटल परियोजनाओं का तेजी से कार्यान्वयन संभव हो सकेगा।


कुल मिलाकर, बिहार में नई सरकार ने न केवल अनुभव और शिक्षा का संतुलित मंत्रिमंडल तैयार किया है, बल्कि जनता के विकास और सामाजिक कल्याण के एजेंडे को भी प्राथमिकता दी है। आगामी महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मंत्रिपरिषद किस प्रकार राज्य की प्रशासनिक और विकासात्मक चुनौतियों का सामना करती है और बिहार के नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरती है।