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30-Sep-2021 06:54 AM
PATNA : देश में गाड़ियों की इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब गाड़ियों का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य कर दिया गया है, भले ही आपकी गाड़ी घर में खड़ी ही क्यों ना हो। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। मंत्रालय ने बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के सहयोग से सभी राज्यों में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस सुनिश्चित करने को लेकर फैसला किया है।
महाराष्ट्र समेत देश के कुछ अन्य राज्यों में इसकी शुरुआत कर दी गई है। कुछ राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी को जमीन पर उतारा जा रहा है। फिलहाल पहले चरण में सड़क पर चल रही गाड़ियों का ही थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जांचा जा रहा है। जब इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो वैसी गाड़ियां जो सड़क पर नजर नहीं आ रही उनकी भी जांच की जाएगी। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण केंद्र सरकार की एक एजेंसी है और यह सभी राज्यों के डीटीओ को यह जानकारी देगा कि किस गाड़ी का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराया गया है और किसका नहीं। अगर किसी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो चुका है तो इसके लिए गाड़ी मालिक को नोटिस भी भेजा जाएगा।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में बीमा कराने वाले को कोई फायदा नहीं होता लेकिन बीमा कराने वाले को कोई घाटा भी नहीं होता है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने वाले वाहन से अगर किसी को धक्का लगता है और उसकी मौत हो जाती है या वह घायल हो जाता है, तो बीमाधारक संबंधित बीमा कंपनी से पीड़ित को क्षतिपूर्ति दिला सकता है। अस्पताल का खर्च भी गाड़ी मालिक को देना नहीं होता है। बीमा कंपनी ही उस राशि का भुगतान करती है। थर्ड पार्टी बीमा को लाइबिलटी कवर के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमा तीसरे पक्ष से संबंधित होता है। अगर किसी ने वाहन का थर्ड पार्टी बीमा कराया है और कोई दुर्घटना होती है तो तीसरी पार्टी को बीमा कंपनी क्लेम देती है। यहां फर्स्ट पार्टी वाहन चलाने वाला और थर्ड पार्टी वाहन की चपेट में आने वाला होता है। वाहन की चपेट में आने वाले के आर्थिक नुकसान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को अनिवार्य कर दिया है।