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कोटा में फंसे बिहारी छात्रों पर सियासत गरमायी : तेजस्वी ने बच्चों को वापस लाने की अनुमति मांगी, JDU ने नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी जताई चिंता

20-Apr-2020 09:33 AM

PATNA : बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कोटा में फंसे बच्चों पर नया दांव चला है। तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार अगर कोटा में फंसे बच्चों को लाने में असमर्थ है तो हमें परमिशन दें। हम वहां फंसे बच्चों को उनके हाल पर नहीं छोड़ सकते हन उन्हें अपने बूते वापस लेकर आएंगे। 


तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ख़ास लोगों के प्रति समर्पित बिहार सरकार अगर कोटा में फंसे आम विद्यार्थियों को लाने में अक्षम, अशक्त और असमर्थ है तो हमें विशेष अनुमति प्रदान करें,हम उन 6500 छात्रों को बिहार लेकर आएंगे।संकट की इस घड़ी में बिहार के भविष्य  निर्दोष नादान बच्चों को ऐसे नहीं छोड़ सकते।अनुमति दिजीए।


वहीं इस पूरे मसले पर जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया है कि हे समर्थवान, सक्षम तेजस्वी जी , इस लॉक डाउन में कब प्रकट होंगे? ट्विटर पर गाल बजा रहे है.लेकिन खुद क्षमता क्या है ये नही बता रहे. कोटा के छात्रों पर राजनीति मत कीजिये। बिहार सरकार सक्षम है, सशक्त है , समर्थ है.श्री नीतीश कुमार सबकी चिंता करते है , आपकी भी। तेजस्वी जी, जो व्यक्ति खुद पलायनवादी हो वह दूसरों को मदद क्या देगा? विपदा के समय पीठ दिखाकर भाग जाना आपकी पहचान है। जहां भ्रष्टाचार हो वहां आगे और जहां आपदा हो वहाँ अदृश्य.. यही आपकी विशेषता है। बिहार की जनता आपकी क्षमता को अच्छे से जानती है।तेजस्वी यादव जी, ट्विटर पर एलान करने और कोरोना महामारी के बीच जमीन पर उतर कर काम करने में फर्क है। लेकिन जिन्हें विशुद्ध राजनीति करनी हो वह इस अंतर को क्या समझेंगे।




दरअसल हिसुआ से बीजेपी विधायक अनिल सिंह सरकार से परमिशन लेकर अपनी बेटी को कोटा से वापस लेकर आए उसके बाद से बिहार की सियासत गरमा गयी है। तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला और भी तेज कर दिया है। उन्होनें कहा कि पास देकर प्रभावशाली लोगों के बच्चों को चुपचाप वापस बुलाया गया, लेकिन जब साधारण छात्रों और आम लोगों के बच्चों को बुलाने की बात आई तो मुख्यमंत्री मर्यादा और नियमों का हवाला देने लगते हैं। 


तेजस्‍वी ने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हम लगातार सरकार से सवाल कर रहे हैं, क्योंकि हम सत्ता में बैठे लोगों की दोहरी नीति से वाकिफ हैं। महामारी और विपदा की घड़ी में भी ये लोग आम और खास का वर्गीकरण कर राजनीति कर रहे हैं। तेजस्वी ने पूछा कि गरीबों और मजदूरों के साथ अन्याय और बेरुखी क्यों?