मुंगेर में इंटर परीक्षार्थी 3 दिन से लापता, दोस्त पर अपहरण का आरोप RJD के पूर्व विधायक रियाजुल हक ने थामा JDU का दामन, लालू-तेजस्वी की पार्टी को बड़ा झटका 8 फरवरी से बिहार यात्रा पर निकलेंगे प्रशांत किशोर, हार के बाद जन सुराज को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी पूर्णिया में जमीन विवाद बनी बड़ी समस्या, शिवम मेडिकल कॉलेज निर्माण में अड़चन का आरोप नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा फैसला: बिहार में गर्ल्स हॉस्टल-लॉज के लिए नियम सख्त, 24 घंटे महिला वार्डन अनिवार्य, जानिये पूरी गाईडलाइन झारखंड के गोड्डा हॉस्टल से फरार 4 नाबालिग बच्चे जमुई स्टेशन पर बरामद, GRP ने परिजनों से मिलाया PMCH और NMCH में फ्लाइंग स्क्वायड की रेड, पकड़ा गया दलाल सफाईकर्मी टर्मिनेट बिहार से लापता 3 नाबालिग बच्चियां दिल्ली से बरामद, पुलिस ने किया परिजनों के हवाले गुलज़ारबाग़ प्रिंटिंग प्रेस के दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण बदहाली का आलम देखिये: दिन के उजाले में मरीज का मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ ईलाज
29-Apr-2020 02:13 PM
SUPAUL : लॉकडाउन में परंपराएं टूट रही हैं। लॉकडाउन के दौरान हमारे सामने ऐसी खबरें आ रही हैं जो दिलों को झकझोर कर रख देती हैं। एक पिता के तीन बेटे लॉकडाउन में बाहर फंसे रह गये। बाद में उन बेटों की मां और उस व्यक्ति की पत्नी ने अपने पति का अंतिम संस्कार किया। ये वक्त का तकाजा कहे या फिर इंसान की मजबूरी समाज बदल रहा है।
मामला सदर प्रखंड स्थित बरूआरी वार्ड नंबर छह का है। यहां 68 साल के लखन साह की मौत सोमवार रात को हो गई। इनके तीनों बेटे संजय साह, रामचंद्र साह और चंद्रकिशोर साह दिल्ली में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन के कारण ये घर नहीं आ सके। गांव के लोगों ने निर्णय लिया कि भतीजे से मुखाग्नि दिलवाई जाए, लेकिन भतीजे ने इससे इन्कार कर दिया। इसके बाद लखन साह की पत्नी सुमित्रा देवी ने उन्हें मुखाग्नि दी।
लखन साह के बड़े बेटे संजय साह ने बताया कि पिता के निधन की सूचना मिलने के बाद उन्होंने दिल्ली में कई अधिकारियों के पास फरियाद की, लेकिन कहीं से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इस कारण वह घर नहीं पहुंच सके। इसके बाद उनकी मां को ही मुखाग्नि देनी पड़ी।