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कोटा विवाद पर सरकार के खिलाफ उतरा छात्र मोर्चा, अध्यक्ष विकाश बॉक्सर ने कहा- VIP कल्चर ठीक नहीं

19-Apr-2020 09:23 PM

PATNA : राजस्थान के कोटा में पढ़ाई करने वाले बिहारी छात्रों की वापसी वापसी को लेकर सवाल खड़ा हो रहे हैं. जिस तरीके से नीतीश सरकार ने हाय तौबा मच आया था, अब बिहार के ही बीजेपी विधायक अनिल सिंह ने राजस्थान के कोटा में पढ़ाई कर रहे अपनी बेटी और उसके दोस्तों को वहां से वापस बुला लिया है. सरकार के इस दोहरे रवैये के खिलाफ छात्र मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विकाश बॉक्सर ने सवाल खड़ा किया है. उन्होंने सरकार को घेरने का काम किया है.


सरकार के इस रवैये से नाराज छात्र संघ अध्यक्ष विकाश बॉक्सर ने इसे VIP कल्चर बताया है. उन्होंने सरकार के दोहरे चरित्र पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि जो जहां हैं, वहीं रहें. लॉक डाउन में किसी को बाहर से बिहार नहीं लाना है तो फिर BJP विधायक अनिल सिंह को अपने बेटे को कोटा से लाने की परमिशन क्यों दी गई ? यह VIP कल्चर ठीक नहीं है.


छात्र मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विकाश बॉक्सर ने आगे कहा कि बिहार के कितने मजदूर और और कितनों का बेटा बाहर फंसा है. क्या सरकार उनके बारे में थोड़ा भी सोचती है. क्या ऐसे लोगों की कोई वैल्यू नहीं है. गरीब, दिहाड़ी मजदूर और जरूरतमंद लोगों के लिए बिहार सरकार को चिंता करनी चाहिए. एक विधायक अपनी बेटी को कोटा से मंगवाने के लिए पावर का गलत इस्तेमाल करते हैं.  जो बच्चे हकीकत में परेशानी झेल रहे हैं, उन्हें ये सरकार संयम बनाए रखने की बात कर रही है. सरकार की ओर से यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है. विकाश बॉक्सर ने अंत में नीतीश सरकार से छात्रों के हित में सोचनी की अपील की और उन्होंने कहा कि अभी भी समय है जो बच्चे वहां परेशानी झेल रहे हैं, उन्हें बिहार लाने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी चाहिए.


बता दें कि शनिवार को ही कोरोना संकट की महामारी में सीएम नीतीश ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आज अधिकारियों के साथ बैठक की थी. इस बैठक में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉक डाउन को सख्ती से लागू करे के लिए विशेष तौर पर चर्चा हुई. इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि कोटा से छात्रों को वापस लाने की मांग पर कहा कि ऐसे तो लॉक डाउन का मजाक उड़ जायेगा. सीएम नीतीश ने साफ़ तौर पर इस बैठक में कहा कि कोटा मामले में कुछ लोग नहीं माने और अपने कोटा से आ गए. उन्हें बॉर्डर पर रखा गया. वहां उनका टेस्ट करा कर उनको घर भेजने की व्यवस्था की गई. अब कोई कहे कि कोटा में जो लोग फंसे हैं. उनको फिर से बुलवा लिया जाये. इसके साथ ही देश के कोने-कोने में भी जो फंसे हुए हैं, उनकी मांग अगर सभी राज्य मानने लगे तो लॉक डाउन का मजाक उड़ जायेगा. हमलोगों का कमिटमेंट तो पूरे तौर पर है.