Bihar Assembly : बजट सत्र में आज भी टकराव के आसार, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष New toll rule 2026 : एक्सप्रेसवे यात्रियों को राहत! टोल वसूली नियमों में बड़ा बदलाव, अब नहीं देना होगा पूरा शुल्क Bihar Road News : बिहार के इस ग्रीनफील्ड फोरलेन पर जल्द दौड़ेंगी गाड़ियां, डीएम ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश Mahila Rojgar Yojana Bihar : बिहार की महिलाओं के खाते में होली के बाद आएंगे 20-20 हजार रुपए, जानिए दूसरी क़िस्त लेने के क्या है नियम Traffic Management : पटना के इन रास्तों पर इस दिन नहीं चलेंगी गाड़ियां, बदली ट्रैफिक व्यवस्था; जानिए क्या है वजह Bihar Intermediate Exam 2026 : आज समाप्त होगी बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2026, इस दिन तक रिजल्ट आने की उम्मीद Bihar weather : बिहार में फरवरी में ही गर्मी का असर: मौसम विभाग ने बताया तापमान बढ़ने का कारण शराब और अवैध हथियार के खिलाफ सहरसा पुलिस की कार्रवाई, घर की घेराबंदी कर अपराधी को दबोचा, हथियार-कारतूस भी बरामद मोतिहारी में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, 4 महिलाएं और 2 दलाल गिरफ्तार पटना के मरीन ड्राइव पर नहीं लगेंगी दुकानें, अब यहां बनेगा नया वेंडिंग जोन
09-Nov-2022 05:37 PM
PATNA: बिहार में जातीय जनगणना का मुद्दा एक बार फिर से गरमाने लगा है। इसको लेकर बीजेपी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठा दिया है। बीजेपी सांसद और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है। सुशील मोदी ने कहा है कि बिहार में जातीय जनगणना को लेकर नीतीश की सरकार गंभीर नहीं है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद सरकार ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि 1 जून 2021 की सर्वदलीय बैठक के निर्णय और 2 जून को कैबिनेट की मंजूरी के 6 महीने बीतने के बाद भी महागठबंधन सरकार जातीय जनगणना शुरू करने को लेकर गंभीर नहीं है। जातीय जनगणना का काम दो चरणों में होना था, जबकि छह महीने बीतने के बाद अभी मकानों की गिनती और नम्बरिंग का पहला चरण भी शुरू नहीं हो सका है। दूसरे चरण में जातीय और आर्थिक गणना शुरू होनी थी, लेकिन सरकार ने इस पूरे अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। दो चरणों वाली जातीय जनगणना शुरू करने से पहले जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर अधिकारियों का जो प्रशिक्षण होना था, वह भी नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के आंकड़े दर्ज करने के लिए जब ऐप और पोर्टल तक अभी विकसित नहीं किये गए हैं, तब सरकार की नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। सरकार जातीय जनगणना कराने पर गंभीर नहीं है, इसलिए केवल तारीख पर तारीख दी जा रही है। निकाय चुनाव के नाम पर और जातीय गणना को छह महीना टालने की तैयारी की जा रही है। अगर सरकार गंभीर है, तो जनगणना का काम जल्द शुरू करे और हर स्तर पर सुझाव लेने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाये। ऐसी बैठकें हर महीने होनी चाहिए ताकि काम में तेजी आए।