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24-May-2022 04:29 PM
DESK: दुनियाभर के देशों में कोरोना के बाद एक नई बिमारी मंकीपॉक्स का खतरा लोगो के सामने आ गया है. आपको बता दे कि केवल दो हफ्तों के अन्दर ही दुनियाभर के 12 देशों में मंकीपॉक्स के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और मामलों की संख्या 100 तक पहुंच चुकी है. आशंका जताई जा रही है कि इस बिमारी के मामले आगे और भी तेजी से बढ़ सकते हैं हालांकि, राहत की बात है कि अब तक किसी भी व्यक्ति की इस बिमारी से मौत नही हुई है. WHO ने इसको लेकर सभी देशों को आगाह किया है.
अबतक डब्ल्यूएचओ नें 92 मंकीपॉक्स के मामलों की पुष्टि की है. ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका जैसे देशों में अब तक मंकीपॉक्स के मामले सामने आ चुके है. वहीं, दूसरी ओर बेल्जियम पहला एक ऐसा देश बन गया है जिसने सभी कंफर्म मामलों के लिए 21 दिन का मंकीपॉक्स क्वारंटाइन पीरियड अनिवार्य कर दिया है.
मंकीपॉक्स एक ऑर्थोपॉक्सवायरस है जो चेचक की तरह है. इस बिमारी के फैलने का कारण ज्यादातर जानवर होते है. यह बिमारी जानवरों से ही इंसानों में फैलती है. यह बिमारी एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन है, जो संक्रमित जानवरों या संक्रमित मनुष्यों के शरीर से निकले छींक, लार के संपर्क में आने से फैल सकते है . यह वायरस सतह ,बिस्तर,कपडे या सांस के माध्यम से भी अन्दर जा सकते है. मंकीपॉक्स पहली बार 1958 में कैद किए गए बंदर में पाया गया था. जिसके बाद यह बिमारी 1970 में पहली बार इंसान को हुई थी जिसकी पुष्टि की गयी थी.
आमतौर पर इसके लक्षण फ्लू जैसे होते है. जिनमें बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, कंपकंपी, थकान जैसी चीजे शामिल हैं. इसके बाद बीमार व्यक्ति के चेहरे पर दाने आ जाते है जो कुछ दिनों के बाद सूखकर गिर जाते है. फिलहाल इस बिमारी के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को चेचक के टीकों की खुराक दी जाती है. इन सभी के अलावा साइंटिस्ट एंटीवायरल दवाएं बनाने की कोशिश कर रहे है.
वहीं भारत में मंकीपॉक्स जैसे बिमारी को लेकर केंद्र सरकार की चिंता और भी बढ़ गई है. इस संक्रमण को तेजी से फैलते देख नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को अलर्ट जारी कर दिया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों के अधिकारियों को यह साफ़ – साफ़ निर्देश दे दिए गए हैं कि वैसे यात्री जो मंकीपॉक्स प्रभावित देशों की यात्रा करके लौट रहे हो उन्हें तुरंत आइसोलेट कर लिया जाए और सैंपल जांच के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजे जाए.