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लू ने बिगाड़ी अस्पतालों की व्यवस्था..कहां हैं तेजस्वी? एम्बुलेंस नहीं मिली तो बुजुर्ग मां को ठेले पर लेकर अस्पताल पहुंचा बेटा, स्ट्रेचर भी नसीब नहीं

19-Jun-2023 02:20 PM

By SONU

NAWADA: एक तरफ सरकार बिहार में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा करती है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। आए दिन नए-नए एम्बुलेंस का अस्पताल को मुहैया करायी जाती है। हरी झंडी दिखाकर एम्बुलेंस को अस्पताल की ओर रवाना किया जाता है। लेकिन हाल यह है कि समय पर एक एम्बुलेंस और स्ट्रेचर तक मरीज को नसीब नहीं हो पाता है। इसका एक उदाहरण बिहार के नवादा जिले में देखने को मिली है। जहां लू लगने से एक बुजुर्ग महिला बुखार से पीड़ित हो गयी। बुजुर्ग मां की तबीयत बिगड़ने के बाद एक युवक ने टॉल फ्री नंबर पर कॉल किया लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। 


एम्बुलेंस के इंतजार में उसने घंटो समय गुजारा लेकिन जब एम्बुलेंस नहीं पहुंचा तो वह खुद ठेले पर बुजुर्ग मां को लिटाकर अस्पताल पहुंचा। समस्या यही खत्म नहीं हुई अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें ना तो स्ट्रेचर मिला और ना ही कोई डॉक्टर ही मिले। काफी देर तक मरीज को लेकर परिजन परेशान रहा। तभी कुछ देर बाद बुजुर्ग महिला का इलाज शुरु हुआ। महिला की हालत गंभीर थी जिसे देखते हुए चिकित्सक ने उन्हें पावापुरी के वीम्स में रेफर कर दिया। जिसके बाद प्राइवेट गाड़ी से परिजन उन्हें पावापुरी ले गये। 


सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद मरीज को एक एम्बुलेंस तक नसीब नहीं होता जबकि खुद स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा करते हैं। बिहार में लू और भीषण गर्मी से लोग मर रहे हैं। कई लोगों की मौतें अब तक हो चुकी है। लेकिन इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव विपक्षी दलों की बैठक की तैयारी में लगे हैं। बड़ी संख्या में मरीज अस्पतालों में भर्ती हो रहे है। उन्हें बेड, स्ट्रेचर, एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हो रहा है। मरीजों का इलाज फर्श पर किया जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने का दावा करने वाले तेजस्वी यादव कहां हैं?


नवादा की यह तस्वीर उनके इस दावे की पोल खोलने का काम कर रहा है। जहां कलाली रोड निवासी 85 वर्षीय वृद्ध महिला सिरोमनी देवी की तबीयत बिगड़ने के बाद एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुआ। थक हारकर उनके बेटे श्रवण ने पड़ोसियों की मदद से मां को ठेले पर लिटाया और घर से अस्पताल की दूरी करीब दो किलोमीटर तय कर नवादा सदर अस्पताल पहुंचे थे तब वहां भी उन्हें स्ट्रेचर तक नहीं मिला। जिसके बाद गोद में उठाकर मरीज को बेड पर ले गये लेकिन मौके पर डॉक्टर भी मौजूद नहीं थे। काफी इंतजार के बाद डॉक्टर आए और मरीज की गंभीर हालत बता पावापुरी रेफर कर दिया।