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पटना का नाम पाटलिपुत्र करने की मांग, उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई। उन्होंने मौर्य काल के गौरवशाली इतिहास का हवाला देते हुए सरकार से नाम परिवर्तन का आग्रह किया।

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04-Feb-2026 04:31 PM

By First Bihar

DELHI: पटना बिहार की राजधानी है, अब इसके नाम को बदलने की मांग उठ रही है। इस मुद्दे को उठाने का काम राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने किया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के दौरान राज्यसभा में पटना का नाम पाटलिपुत्र रखने की मांग की। राष्ट्रपति की अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उन्होंने यह बातें रखी।


उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई। उन्होंने मौर्य काल के गौरवशाली इतिहास का हवाला देते हुए सरकार से नाम परिवर्तन का आग्रह किया। 


उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र हुआ करती थी, जो आज पटना के नाम से जानी जाती है। पाटलिपुत्र कहते ही हमारा सीना चौड़ा होता है, हम गर्व महसूस करते हैं। इसलिए हमल सरकार से आग्रह करना चाहते हैं कि पटना का नाम बदलकर फिर से पाटलिपुत्र किया जाना चाहिए। 


उन्होंने कहा कि 'महामहिम राष्ट्रपति ने अपने भाषण में अतीत के क्षणों को याद करते हुए यह कहा कि जब देशवासी अतीत के महान पड़ावों और अपने पूर्वजों के महान योगदान को याद करते हैं तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। यह प्रेरणा विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा को गति देती है। महामहिम के इन पंक्तियों से हमें भारत का वह कालखंड याद आता है, जब इस देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था।


राज्यसभा में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मौर्य काल के वक्त हमारे देश की सीमा बांग्लादेश, भूटान, अफगानिस्तान, नेपाल सब भारत की सीमा में हुआ करता था। इसके प्रतीक चिन्ह आज भी अतीत के रूप में हमारे सामने हैं। इसलिए हमारी ड्यूटी बनती है कि हम उन कालखंडों पर जो धूल पड़ा है, उसको साफ करें और जीवंत बनाने का काम करें। मैं कुछ महत्वपूर्ण सुझाव हैं, जिसे सरकार के समक्ष रखना चाहता हूं। 


बिहार जब मौर्य का शासन था, उस समय बिहार का गौरव और सम्मान पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा था। मौर्य काल के समय में बिहार का इतिहास गौरवान्वित करने वाला है। इनके चिन्ह हर जगह मशहूर हैं। इससे पहले कलकत्ता का नाम कोलकाता किया गया। ठीक उसी तरह उड़ीसा का ओडिशा और बंबई का नाम बदलकर मुंबई रखा गया। जब सब शहरों के नाम बदले जा सकते हैं, फिर पटना का नाम पाटलिपुत्र क्यों नहीं किया जा सकता है?