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02-Jun-2025 11:33 AM
By First Bihar
cybercrime awareness: अक्सर लोगों को लगता है कि स्मार्टफोन हैकिंग किसी हाई-टेक तकनीक से होती है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। ज्यादातर साइबर हमले बेहद साधारण और हमारी रोजमर्रा की आदतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। स्कैमर्स अब न तो किसी जटिल कोडिंग का सहारा लेते हैं, न ही किसी खतरनाक सॉफ्टवेयर का – बल्कि वो भरोसे, आदत और आपकी त्वरित प्रतिक्रिया को निशाना बनाते हैं।
इसलिए जरूरी है कि आप हमेशा सतर्क और सजग रहें, क्योंकि साइबर अपराधी कुछ बेहद सामान्य सी दिखने वाली तरकीबों से आपको बड़ी आसानी से फंसा सकते हैं। आइए जानते हैं वो 4 आम तरीके जिनसे लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं:
फर्जी QR कोड से पेमेंट स्कैम
QR कोड से पेमेंट करना जितना आसान है, उतना ही खतरनाक भी बन गया है। स्कैमर्स असली QR कोड की जगह नकली कोड वाला स्टिकर चिपका देते हैं। जैसे ही आप पेमेंट करते हैं, पैसा सीधे उनके अकाउंट में चला जाता है। लोग आसानी से फंस जाते हैं क्योंकि यह प्रक्रिया हमारी दिनचर्या में शामिल हो गई है।
खतरनाक ऐप्स जो दिखते हैं भरोसेमंद
फ्लैशलाइट, बैटरी सेविंग या फाइल क्लीनर जैसे ऐप्स अक्सर प्ले स्टोर पर भी मिल जाते हैं, जिससे लोग इन्हें बिना सोचे-समझे डाउनलोड कर लेते हैं। ये ऐप्स एक बार आपके फोन में इंस्टॉल हो जाएं, तो आपकी लोकेशन, मैसेज, कॉन्टैक्ट्स और निजी डेटा तक पहुंच बना लेते हैं — और आपको पता भी नहीं चलता।
फेक कस्टमर केयर नंबर से ठगी
कई बार लोग गूगल पर किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं और पहले लिंक पर कॉल कर देते हैं। साइबर ठग नकली नंबर गूगल पर पोस्ट कर देते हैं, और कॉल पर बैंक या पेमेंट ऐप की जानकारी लेकर अकाउंट खाली कर देते हैं।
फर्जी इनाम या ऑफर के नाम पर लिंक भेजना
आपने लॉटरी जीती है" या "आपका नंबर सिलेक्ट हुआ है" जैसे मैसेज या मेल आना आम बात हो गई है। इनमें एक लिंक होता है जिसे क्लिक करते ही आपके फोन में मालवेयर घुस जाता है या बैंक जानकारी चुरा ली जाती है।
सावधानी ही सुरक्षा है:
QR कोड स्कैन करते समय ध्यान दें कि वह असली है या नहीं।
ऐप इंस्टॉल करने से पहले रिव्यू और परमीशन्स जरूर चेक करें।
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
कस्टमर केयर नंबर केवल ऑफिशियल वेबसाइट से ही लें।