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Sanchaar Saathi App: संचार साथी ऐप पर विवाद के बीच सरकार का बड़ा एलान, संसद में केंद्र सरकार ने कहा- यूजर्स चाहें तो..

Sanchaar Saathi App: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि संचार साथी ऐप अनिवार्य नहीं है। उपभोक्ता इसे अपने फोन में रख सकते हैं या डिलीट कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इससे न तो जासूसी होती है और न मॉनिटरिंग।

02-Dec-2025 01:34 PM

By FIRST BIHAR

Sanchaar Saathi App: संचार साथी ऐप को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह ऐप अनिवार्य नहीं है और उपभोक्ता इसे अपनी इच्छा से फोन में रख सकते हैं या डिलीट भी कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कहा कि ऐप न तो जासूसी करता है और न ही कॉल मॉनिटरिंग का कोई खतरा है।


दरअसल, दूरसंचार विभाग ने नवंबर में एक निर्देश जारी किया था, जिसमें संचार साथी ऐप को फोन में अनिवार्य रूप से रखने की बात कही गई थी। विपक्ष ने इस ऐप के जरिए जासूसी होने का आरोप लगाते हुए सरकार पर निशाना साधा था।


जिसपर संसद में जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि, “न कोई जासूसी है, न कॉल मॉनिटरिंग। अगर आप चाहें तो ऐप को एक्टिवेट करें, नहीं चाहें तो मत करें। फोन में रखना है तो रखें, नहीं रखना है तो डिलीट कर दें। संचार साथी इस्तेमाल नहीं करना है, तो रजिस्टर भी न करें। ऐप को डिलीट करने में किसी तरह की परेशानी नहीं है।”


उन्होंने आगे कहा कि यह ऐप उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ा है और इसका उद्देश्य लोगों को फर्जी कॉल, धोखाधड़ी और चोरी से बचाना है। उनके अनुसार, ऐप अनिवार्य नहीं है, लेकिन हर व्यक्ति तक इसकी जानकारी पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है—क्योंकि कई उपभोक्ता अभी भी इससे मिलने वाले सुरक्षा लाभ से अनजान हैं।


मंत्री ने विपक्ष की आलोचना को लेकर कहा, “जब विपक्ष के पास मुद्दे नहीं होते, तो वे विवाद खोजने की कोशिश करते हैं। संचार साथी एक ऐसा ऐप और पोर्टल है जो उपभोक्ता को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करने का अवसर देता है। यह जनभागीदारी का कदम है और इसका स्वागत होना चाहिए।”


सिंधिया ने संचार साथी से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, ऐप के डेढ़ करोड़ से अधिक और पोर्टल के 20 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस पहल के चलते अब तक लगभग पौने दो करोड़ फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए हैं। 


इसके अलावा, करीब 20 लाख चोरी हुए फोन ट्रेस किए गए और सात लाख से अधिक फोन उपभोक्ताओं को वापस सौंपे गए। लगभग 21 लाख फोन उपभोक्ताओं द्वारा पहचान और रिपोर्टिंग के आधार पर डिसकनेक्ट किए गए हैं।