पटना NEET छात्रा केस में नया मोड़, मनीष रंजन की जमानत पर सुनवाई के दौरान वकील ने जांच पर उठाए गंभीर सवाल

पीड़ित के अधिवक्ता ने बताया कि झूठ के पैर नहीं होते, भले सत्य को परेशान किया जा सकता है लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। यह सारी चीजे अदालत को एक-एक करके हम बता रहे है। आज भी लंबी सुनवाई चली। इस मामले की अगली सुनवाई कल के लिए स्थगित कर दी गयी है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 11, 2026, 4:43:10 PM

बिहार न्यूज

12 मार्च को अगली सुनवाई - फ़ोटो रिपोर्टर

PATNA:पटना में चर्चित नीट छात्रा मामले में आरोपी मनीष रंजन की जमानत पर आज कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले को लेकर पहले भी सुनवाई हो चुकी है, लेकिन कुछ कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों को देखते हुए अगली तारीख निर्धारित की गई। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 12 मार्च दिन गुरुवार को तय की गई है। 


पीड़ित पक्ष के वकील एस.के. पांडेय ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जमानत पर सुनवाई हुई जांच अधिकारियों की कलाइयां परत दर परत खुलती गयी। अब तक जांच अधिकारी सबको गुमराह कर रहे थे, यह कह रहे थे कि यह केस आत्महत्या का है। लेकिन आज अदालत में हमलोगों ने अपना पक्ष रखा। 


हमलोगों ने कोर्ट को यह बताया कि तबीयत बिगड़ने के बाद बच्ची को 3 बजकर 51 मिनट पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल के पास स्थित सहज हॉस्पिटल वार्डन लेकर पहुंची थी। जो लोग उसे अस्पताल ले गये थे, उन लोगों ने यह बताया कि ठंड के कारण बच्ची बेहोश हो गयी। जबकि सहज हॉस्पिटल वाले डॉक्टर अपने बयान में बताते हैं कि उन्होंने कोई इलाज नहीं किया। जबकि वहां तीन घंटे तक बच्ची का इलाज चला। आई विटनेस का बयान यह बताता है कि सहज हॉस्पिटल में बच्ची को पांच बोतल पानी चढ़ाया गया था। सहज हॉस्पिटल तक बच्ची की बेहोशी का कारण ठंड लगना बताया जा रहा था।


शाम के 7 बजकर 20 मिनट में सहज हॉस्पिटल से जब बच्ची को प्रभात मेमोरियल लाया गया तब वहां बेहोशी का कारण नींद की गोलियों का अत्यधिक सेवन बताया गया। आश्चर्य की बात है कि नींद की गोलियां 7 जनवरी को हॉस्टल की सफाई के दौरान वार्डन चंचल को मिलती है। तो सवाल यह पैदा होता है कि जो नींद की गोलियां 7 जनवरी को मिलती है, इसके बारे में प्रभात हॉस्पिटल को एक दिन पहले 6 जनवरी को ही कैसे पता लग गया। 


पीड़ित पक्ष के वकील एस.के. पांडेय ने आगे बताया कि इन सारी घटनाक्रम को देखने से यह लगता है कि पीड़ित परिवार के हिसाब से गर्ल्स हॉस्टल में हाई प्रोफाईल सेक्स रैकेट चल रहा था। लड़कियों के खाने में नशे की गोलियां मिलाई जाती थी। उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था, यह केस काफी संवेदनशील है। इस केस में अभी तक की जांच में अधिकारी बताते आ रहे थे कि लड़की ने रात का भी खाना नहीं खाया था जबकि मृतका अपनी माता को फोन पर बताती है कि उसने रात में खाना खा लिया है, खाने में रोटी बैगन की सब्जी थी। यह बयान दर्ज है।


पीड़ित के अधिवक्ता ने बताया कि झूठ के पैर नहीं होते, भले सत्य को परेशान किया जा सकता है लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। यह सारी चीजे अदालत को एक-एक करके हम बता रहे है। आज भी लंबी सुनवाई चली। इस मामले की अगली सुनवाई कल के लिए स्थगित कर दी गयी है। कल पुन सुनवाई होगी।


उन्होंने बताया कि इस दौरान यह पता चला है कि मनीष रंजन का कनेक्शन बहुत बड़े बड़े सत्ता के रसुखदारों से है। हॉस्टल के पास लंबी लंबी गाड़ियां खड़ी होती थी। आस पास के लोगों ने यह बात बताया। जो गवाह है उन्हें जांच एजेसियों द्वारा डराया जा रहा है धमकाया जा रहा है और तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है। 


इस केस में मृतका के परिवार का बयान जो कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज होना चाहिए। लेकिन इस केस में आज तक पीड़ित पक्ष का मजिस्ट्रेट के सामने कोई बयान दर्ज नहीं कराया गया। 6 मार्च को हमने सीबीआई को लिखित आवेदन दिया कि इस केस में पीड़ित पक्ष का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया जाए लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया, यह बात आज हमने अदालत को बतायी है। सीसीटीवी फुटेज के साथ भी छेड़छाड़ किया गया है।