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09-Jun-2025 09:38 AM
By First Bihar
5th Generation Fighter Jet: भारत ने अपने पहले 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर काम शुरू कर दिया है। जो रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) मिलकर विकसित कर रहे हैं। मई 2025 में रक्षा मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दी थी और इसे रिकॉर्ड समय में पूरा करने की कोशिश चल रही है। अनुमान है कि पहला प्रोटोटाइप 2031 तक और सीरियल प्रोडक्शन 2035 तक शुरू हो सकता है।
AMCA का इंजन एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि तेजस प्रोजेक्ट में इंजन की आपूर्ति में देरी ने प्रोग्राम को प्रभावित किया था। अब अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस AMCA Mk-1 के लिए F414 इंजन देगी, जो 98 kN थ्रस्ट प्रदान करता है और बोइंग F/A-18 जैसे जेट्स में इस्तेमाल होता है। जीई के दक्षिण एशिया प्रमुख अमित अग्रवाल ने कहा कि कंपनी मेक इन इंडिया के तहत भारत में 80% तक स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को प्राथमिकता दे रही है। इसका लक्ष्य भारत में एक मजबूत एयरोस्पेस विनिर्माण इकोसिस्टम बनाना है।
मार्च 2025 में जीई ने HAL को तेजस Mk-1A के लिए F404-IN20 इंजनों की पहली खेप सौंपी और अब F414 इंजनों की डिलीवरी तेज हो रही है। भारतीय वायुसेना ने 83 तेजस Mk-1A जेट्स के लिए 48,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया है और 97 और जेट्स के लिए 67,000 करोड़ रुपये का अनुबंध विचाराधीन है।
AMCA एक दोहरे इंजन वाला स्टील्थ जेट होगा। जो हवा से हवा में युद्ध, जमीनी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें कम रडार क्रॉस-सेक्शन, आंतरिक हथियार बे, सुपरक्रूज़ और AI-आधारित सेंसर फ्यूजन जैसी उन्नत तकनीकें होंगी। यह 6,500 किलो ईंधन और 5,500 किलो हथियार ले जा सकता है। AMCA भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को पूरा करेगा और चीन के J-20 व J-35A जैसे जेट्स का मुकाबला भी करेगा।
AMCA Mk-2 के लिए भारत 120 kN थ्रस्ट वाला स्वदेशी इंजन चाहता है, जिसके लिए फ्रांस की सैफरान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस के साथ बातचीत चल रही है। DRDO का गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट इसे लीड करेगा, ताकि 6वीं पीढ़ी की तकनीकों को शामिल किया जा सके। स्टील्थ डिज़ाइन और स्वदेशी इंजन विकास में तकनीकी और वित्तीय जोखिम भी हैं। रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों जैसे लार्सन एंड टुब्रो और गोदरेज एयरोस्पेस को शामिल कर HAL पर निर्भरता कम करने का फैसला किया है।