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India Post Payment Bank : रातोंरात करोड़पति बना मैट्रिक का छात्र, किसान के बेटे के खाते में आए 21 करोड़ रुपये; जानिए क्या है पूरा मामला

बेतिया के रायबरवा गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया जब किसान के बेटे सुनील कुमार के खाते में अचानक 21 करोड़ रुपये आ गए। मामला साइबर फ्रॉड से जुड़ा बताया जा रहा है। डाक विभाग ने खाता फ्रीज कर जांच शुरू कर दी है, जिससे गांव में दहशत और जिज्ञासा दोनों फैल

India Post Payment Bank : रातोंरात करोड़पति बना मैट्रिक का छात्र, किसान के बेटे के खाते में आए 21 करोड़ रुपये; जानिए क्या है पूरा मामला

09-Nov-2025 04:02 PM

By First Bihar

India Post Payment Bank : बिहार के बेतिया जिले के लौरिया प्रखंड के साठी पंचायत के रायबरवा गांव में इन दिनों एक ही नाम चर्चा का विषय बना हुआ है — सुनील कुमार। एक साधारण किसान का बेटा, जो मैट्रिक का छात्र है, अचानक तब सुर्खियों में आ गया जब उसके इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक खाते में 21 करोड़ 55 लाख 50 हजार रुपये जमा हो गए। गांव में यह खबर फैलते ही मानो सनसनी मच गई। हर कोई यही पूछ रहा था — “आखिर यह पैसा आया कहां से?”


अचानक खाते में करोड़ों रुपये आने से हड़कंप

जानकारी के मुताबिक, रायबरवा गांव के वार्ड नंबर 4 निवासी किसान कन्हैया साह का बेटा सुनील कुमार पिछले एक सप्ताह से अपने बैंक खाते से लेन-देन नहीं कर पा रहा था। जब परिजनों ने बेतिया प्रधान डाकघर जाकर जांच कराई, तो वहां के अधिकारियों ने बताया कि खाते में भारी रकम आने के कारण खाते को सस्पेंड (होल्ड) कर दिया गया है। डाक अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह राशि साइबर फ्रॉड से जुड़ी हुई लगती है और इस मामले में पश्चिम बंगाल के विधान नगर साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।


परिवार की हैरानी और ग्रामीणों की जिज्ञासा

किसान पिता कन्हैया साह ने बताया, “हम तो रोज खेत-खलिहान में मेहनत करते हैं, हमारे परिवार का किसी बड़ी रकम से कोई लेना-देना नहीं। अब यह पैसा हमारे बेटे के खाते में कहां से आया, यह हम खुद नहीं जानते।” जैसे ही यह खबर फैली, गांव में उत्सुकता की लहर दौड़ गई। आस-पास के गांवों से लोग रायबरवा पहुंचने लगे ताकि देख सकें कि आखिर कैसे एक गरीब किसान का बेटा एक दिन में करोड़पति बन गया। कोई इसे “किस्मत का खेल” कह रहा है, तो कोई “साइबर ठगी की चाल” बता रहा है।


डाक विभाग और पुलिस जांच में जुटी

डाक विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि सुनील के खाते में आई यह राशि किसी बड़े साइबर घोटाले से जुड़ी हो सकती है। इसी वजह से खाते को तुरंत फ्रीज कर दिया गया है। अब इस पूरे मामले की जांच साइबर विशेषज्ञों के साथ-साथ बेतिया पुलिस और डाक विभाग की संयुक्त टीम कर रही है। एक अधिकारी ने बताया कि अक्सर साइबर अपराधी फर्जी खातों का उपयोग कर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) करते हैं। वे कई बार निर्दोष लोगों के बैंक खातों में अवैध राशि डालते हैं ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।


साइबर फ्रॉड का बढ़ता जाल

भारत में पिछले कुछ वर्षों में साइबर फ्रॉड के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। ठग अब गांव-गांव तक अपनी जड़ें फैला चुके हैं। मोबाइल ऐप, यूपीआई, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट के बढ़ते उपयोग के साथ ही ठगी के तरीके भी बदल गए हैं।


विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार साइबर अपराधी फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल, या लॉटरी जीतने का झांसा देकर लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। वहीं, कुछ मामलों में अपराधी निर्दोष लोगों के खातों में पैसे डालकर हवाला या फर्जी ट्रांजैक्शन का रास्ता अपनाते हैं, ताकि वास्तविक अपराध का पता लगाना मुश्किल हो जाए।


गांव में डर और चर्चा दोनों

रायबरवा गांव में अब हर गली, हर चौपाल पर यही चर्चा है कि आखिर यह रकम कहां से आई। कुछ लोग सुनील के परिवार के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं, तो कुछ शक की नजर से देख रहे हैं। गांव के ही एक बुजुर्ग ने कहा, “पहले तो लगा कि लड़के की किस्मत खुल गई है, पर अब पता चला कि यह साइबर ठगी का मामला है, तो डर लगने लगा है।”


लोगों को दी जा रही है सावधानी की सलाह

डाक विभाग और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान खाते से आए पैसे को लेकर तुरंत बैंक या पुलिस को सूचित करें। बिना जानकारी के ऐसे पैसों को छूना भी अपराध हो सकता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी खाते में अनजाने में पैसा ट्रांसफर होता है, तो उसका लेन-देन बंद कर तुरंत रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए।


फिलहाल जांच जारी, गांव में बढ़ी चौकसी

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह रकम कहां से आई, किस खाते से ट्रांसफर हुई और सुनील के खाते का इस्तेमाल किसने किया। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, सुनील और उसका परिवार असमंजस में है। वहीं रायबरवा गांव में यह घटना साइबर अपराध की नई मिसाल बन गई है — एक ऐसा मामला जिसने दिखा दिया कि डिजिटल युग की ठगी अब गांवों के दरवाजे तक पहुंच चुकी है।


बेतिया का यह मामला न सिर्फ प्रशासन के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी एक चेतावनी है। साइबर फ्रॉड से सतर्क रहना अब केवल शहरों की जरूरत नहीं, बल्कि गांवों की भी जिम्मेदारी बन चुकी है। डिजिटल बैंकिंग की सुविधा के साथ जागरूकता ही इस ठगी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।