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अपनी पत्नी से ज्यादा फाइलों से प्यार करते हैं अधिकारी, नितिन गडकरी ने कसा तंज, कहा..फाइलों को दबाकर ना रखें

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की 1 तारीख को वेतन मिल जाता है, लेकिन ठेकेदार और उद्यमी कर्ज लेकर काम करते हैं। इसलिए अधिकारियों को इनका दर्द समझना चाहिए जो वर्षों तक भुगतान या मंजूरी के लिए परेशान रहते हैं।

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अधिकारियों को दी चेतावनी
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: देश के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकारी अधिकारियों पर तंज कसा। कहा कि अपनी बीवी से भी ज्यादा ये लोग फाइलों से प्यार करते हैं, जिसके चलते कोई भी फैसला लेने में देर हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों से यह अपील किया कि वो किसी भी फाइल को ना रोकें।


 यदि मंजूर हो तो मंजूर करे नहीं तो नामंजूर कीजिए, दोनों में से कोई ना कोई फैसला लें। ताकि विकास कार्य बाधित ना हो। क्योंकि फाइलों को अपने पास रोककर रखने से ठेकेदारों और उद्यमियों को भारी नुकसान होता है। क्योंकि ये लोग कर्ज लेकर काम करते हैं, ऐसा करने से लोग भारी परेशानी में पड़े रहते हैं।  


नागपुर में राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्र नितिन गडकरी ने मजाकिया लहजे में कहा कि सरकारी अधिकारी फाइलों से अपनी पत्नी से भी ज्यादा प्यार करते हैं, जिस कारण वे फाइलों को अनावश्यक रूप से रोककर रखते हैं। नितिन गडकरी ने अधिकारियों से फाइलों को दबाकर ना रखने की अपील की और समय पर निर्णय लेने को कहा। 


इस दौरान नितिन गडकरी ने एक पुरानी घटना का जिक्र भी किया। बताया कि मैंने एक बार एक अफसर से पूछा था कि आप अपनी पत्नी से प्यार करते हैं, ठीक है, लेकिन फाइलों से उससे भी ज्यादा क्यों करते हैं? एक बार फाइल आती है तो उसे दबाकर रख देते हैं। अगर मंजूर करनी है तो करें, ना मंजूर करनी है तो करें, लेकिन कुछ तो निर्णय लें। फाइलों को यूं ही रोक कर रखने से क्या फायदा।


केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की 1 तारीख को वेतन मिल जाता है, लेकिन ठेकेदार और उद्यमी कर्ज लेकर काम करते हैं। इसलिए अधिकारियों को इनका दर्द समझना चाहिए जो वर्षों तक भुगतान या मंजूरी के लिए परेशान रहते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि कोई काम नियम में फिट नहीं बैठता है तो सीधे ना कह दें, लेकिन निर्णय तो जरूर लें। 


टैक्स वसूलिए, छापेमारी कीजिए, लेकिन निर्णय लेना मत भूलिए। उन्होंने आगे कहा कि  कि निर्णय लेने में देरी से ठेकेदार और उद्यमियों को भारी नुकसान होता है और सरकारी कामकाज भी प्रभावित होता है। उन्होंने एक बड़े अधिकारी से यहां तक कह दिया था कि वह 'अमर प्रेम' के साक्षात्कार हैं, क्योंकि वह अपनी पत्नी से भी कई गुना ज्यादा फाइल से प्यार करते हैं। उनके इस तंज के बाद अधिकारी को अपनी गलती का एहसास हुआ।

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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