25 से 29 मार्च तक पटना में सबसे बड़ी चेस रेटिंग प्रतियोगिता, रूस-जिंबाब्वे और नेपाल के दिग्गज खिलाड़ी हो रहे शामिल भतीजे ने पैर छुकर आशीर्वाद लिया तो नरम हो गये पशुपति पारस, कहा..खून का रिश्ता कभी समाप्त नहीं हो सकता बिहार में अपराधियों का तांडव जारी, पूर्व मंत्री के करीबी की गोली मारकर हत्या, रोते हुए BJP नेता ने की कार्रवाई की मांग बेगूसराय में 12 घंटे में तीसरी वारदात, नाबालिग छात्र आयुष की गोली मारकर हत्या दो सगे भाइयों से शादी रचाने वाली महिला प्रेग्नेंट, घर में आने वाला है नया मेहमान बिहटा में पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी कार्यशाला का सफल आयोजन, ग्रोथ हार्मोन थेरेपी पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी बेलगाम स्कॉर्पियो ने 2 युवतियों को रौंदा, मौत से गुस्साए लोगों ने किया सड़क जाम हंगामा बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा में गोल संस्थान का शानदार प्रदर्शन, कई छात्रों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए, कोचिंग के छात्रों ने मनाया सफलता का उत्सव बिहार में नहीं थम रहा भूमि विवाद का मामला, सासाराम में जमीन के लिए हत्या बिहार दिवस 2026: डॉ. एन. विजयलक्ष्मी की भरतनाट्यम प्रस्तुति ने बांधा समां, शक्ति आराधना और देशभक्ति का अद्भुत संगम
31-Jul-2025 06:34 PM
By First Bihar
PURNEA: बिहार के पूणियां जिले में एक ऐसा स्कूल है, जहां टैंट लगाकर बच्चों को पढ़ाया जाता है। हम बात कर रहे हैं पूर्णिया जिले से 65 किलोमीटर दूर बनमंखी अनुमंडल के जानकीनगर थाना क्षेत्र की कर रहे हैं जहां चांदपुरी भंगहा पंचायत वार्ड नंबर 04 स्थित प्राथमिक विद्यालय ठाकुरपट्टी की यह तस्वीर है। इस स्कूल में महज दो कमरे हैं। जहां कक्षा 1 से 5 तक तक पढ़ाई होती हैं।
इस स्कूल में भवन में दो क्लास रूम ही हैं। बच्चों की उपस्थिति अधिक होने के कारण पहले क्लास के बच्चों को भवन में बैठाया जाता है बाकि बच्चों को टैंट में बिठाकर पढ़ाया जाता है। वहीं दूसरे कमरे में रसोई सहित अन्य सामान रखा जाता है। जो दो कमरे हैं वह भी जर्जर स्थिति में है। इस स्कूल में कुल 156 बच्चे नामांकित हैं और 6 शिक्षक-शिक्षकाए है।
बता दें कि भवनहीन होने के कारण इस विद्यालय में प्राथमिक अशोक नगर को भी मर्ज किया गया है। स्कूल के प्रधानाध्यापक आलोक कुमार ने बताया भवन नहीं होने के कारण बच्चों को टैंट में पढाया जाता है। बता दें 2017 में ही पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्वर्गीय राम भगत के द्वारा इस विद्यालय का निरीक्षण किया गया था और उसी वक्त भवन के लिए अनुशंसा किया गया था।
आठ साल बीत जाने के बावजूद भी यह विद्यालय जस का तस है। यहां एक कमरा तक नहीं बन पाया है। भीषण गर्मी और बारिश के बीच टेंट में बैठकर बच्चों को पढ़ाया जाता है। बिहार सरकार भले ही शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर लें लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। आज तक प्राथमिक विद्यालय ठाकुरपट्टी की तस्वीर नहीं बदली। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार की नजर इस विद्यालय पर कब पड़ती है और कब इस स्कूल का कायाकल्प हो पाता है।
पूर्णिया से प्रफूल झा की रिपोर्ट

