ब्रेकिंग न्यूज़

Bihar New Train: बिहार को आधा दर्जन नई ट्रेनों की सौगात, रेल यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत; इस दिन से होगी शुरुआत Bihar New Train: बिहार को आधा दर्जन नई ट्रेनों की सौगात, रेल यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत; इस दिन से होगी शुरुआत Bihar Crime News: बिहार में ट्रक से 30 लाख रुपए की विदेशी शराब बरामद, तस्करी के नेटवर्क को खंगालने में जुटी पुलिस Farmer Registry ID Bihar : बिहार में Farmer Registry ID बनी किसानों के लिए नई परेशानी, पैतृक जमीन वाले किसान योजनाओं से हो रहे वंचित Bihar News: बिहार ने दर्ज की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि, देशभर में चौथा स्थान हासिल कर रचा इतिहास Bihar News: बिहार ने दर्ज की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि, देशभर में चौथा स्थान हासिल कर रचा इतिहास Bihar News: होली से पहले BSRTC चलाएगी 149 नई डीलक्स बसें, बिहार से दिल्ली और पंजाब से लेकर इन 9 राज्यों का सफर होगा आसान Bihar News: होली से पहले BSRTC चलाएगी 149 नई डीलक्स बसें, बिहार से दिल्ली और पंजाब से लेकर इन 9 राज्यों का सफर होगा आसान Bihar education news : शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही ! जेल में बंद शिक्षक को 22 महीने तक मिलता रहा वेतन, ऐसे खुला पोल Bihar corruption : सरकारी राशन और आवास योजना का लाभ उठा रहे तेजस्वी के नेता! पूर्व विधायक की पत्नी के नाम राशन कार्ड, अब SDO ने दिए जांच के आदेश

Deepak Prakash Kushwaha: कौन हैं दीपक प्रकाश कुशवाहा? जो नहीं लड़े चुनाव, फिर भी बन गए मंत्री

Deepak Prakash Kushwaha: एनडीए के सहयोगी के रूप में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने इस चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पार्टी ने मिली छह सीटों में से चार पर जीत दर्ज की।

Deepak Prakash Kushwaha

20-Nov-2025 12:21 PM

By First Bihar

Deepak Prakash Kushwaha: पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार को भव्य शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ, जहां नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह उनका 10वां कार्यकाल है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उनके साथ कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें कई नए चेहरे शामिल हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रहे वो नाम, जो न तो इस बार चुनाव लड़े और न ही किसी सदन के सदस्य हैं दीपक प्रकाश कुशवाहा, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं।


चुनाव नहीं लड़े, फिर भी बने मंत्री

एनडीए के सहयोगी के रूप में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने इस चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पार्टी ने मिली छह सीटों में से चार पर जीत दर्ज की। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि उपेंद्र खुद मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने बेटे दीपक प्रकाश पर भरोसा जताया। चूंकि दीपक इस समय न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य, इसलिए संविधान के अनुसार उन्हें छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा।


कौन हैं दीपक प्रकाश कुशवाहा?

दीपक प्रकाश अब तक अपने पिता की राजनीतिक छवि और संगठन को मजबूत करने में पर्दे के पीछे से भूमिका निभाते रहे हैं। वे अक्सर चुनावी रणनीति, गठबंधन, सामाजिक समीकरण और पार्टी संगठन से जुड़े अहम निर्णयों में शामिल रहते थे, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देते थे।

उनके मंत्री बनने के साथ ही उनका औपचारिक राजनीतिक पदार्पण बड़े स्तर पर हो गया है। माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी राजनीतिक विरासत को अब धीरे-धीरे दीपक को सौंपने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।


कुशवाहा समीकरण और राजनीतिक संदेश

दीपक प्रकाश को मंत्री बनाना केवल परिवारवाद से जुड़ा निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे लव-कुश (कुशवाहा-कोइरी) समाज को मजबूत संदेश देने की रणनीति भी है। नीतीश कुमार और भाजपा दोनों ही इस सामाजिक वर्ग को अपने साथ मजबूती से जोड़कर रखना चाहते हैं, क्योंकि यह वर्ग कई क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाता है।


कैसे शुरू हुई चर्चा? साक्षी मिश्रा का वायरल पोस्ट

शपथ ग्रहण से ठीक पहले उपेंद्र कुशवाहा की बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा की फेसबुक पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने लिखा- “स्वागत दीपक प्रकाश जी” यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और इसे मंत्री पद की लगभग अनौपचारिक पुष्टि माना जाने लगा। राजनीतिक गलियारों में इसे परिवार की ओर से दी गई मंजूरी के रूप में देखा गया और अगले कुछ घंटों में ही दीपक को शपथ दिलाए जाने की पुष्टि भी हो गई।


एनडीए की रणनीति और गठबंधन राजनीति में संदेश

सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे के दौरान ही एनडीए ने उपेंद्र कुशवाहा के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित कर दी थी। इसी कड़ी में दीपक को मंत्रिमंडल में शामिल करना एनडीए की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस फैसले से न केवल RLM बल्कि कुशवाहा समाज में भी एक मजबूत संदेश गया है कि गठबंधन में उनकी हिस्सेदारी बराबर बनी हुई है।