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12-Aug-2025 07:32 AM
By First Bihar
Namo Bharat Train: पटना-मोकामा रेलखंड पर सोमवार की शाम एक बड़ा रेल हादसा टल गया, जब लगातार बारिश के कारण टेकाबिगहा स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक आंशिक रूप से धंस गया। यह घटना दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत पिलर संख्या 503/12 के पास हुई, जहां ट्रैक के नीचे से मिट्टी बह जाने के कारण डाउन लाइन अस्थिर हो गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए रेलवे प्रशासन ने तत्परता दिखाई और तत्काल ट्रेनों का परिचालन रोक कर मौके पर इंजीनियरिंग टीम भेजी गई।
दरअसल, शाम लगभग 6:30 बजे, जब पटना-जयनगर नमो भारत रैपिड ट्रेन (गाड़ी संख्या 94804) डाउन लाइन से गुजर रही थी, ट्रेन चालक को ट्रैक पर हल्का झटका महसूस हुआ। यह ट्रेन एक सेमी-हाईस्पीड सेवा है, जिससे इसकी गति अन्य ट्रेनों की अपेक्षा अधिक होती है। चालक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ट्रेन की गति नियंत्रित की और कंट्रोल रूम व बख्तियारपुर स्टेशन मास्टर को स्थिति की सूचना दी। इसके तुरंत बाद इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंची और ट्रैक के नीचे की धंसी हुई मिट्टी को भरने का कार्य शुरू किया।
वहीं, रेल प्रशासन द्वारा लगभग 7:30 बजे तक ट्रैक को अस्थायी रूप से दुरुस्त कर दिया गया और डाउन लाइन पर ट्रेनों को धीमी गति से चलाने का कागजी आदेश (सीशन ऑर्डर) जारी किया गया। इसके बाद से रेल परिचालन को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। फिलहाल, ट्रैक की नियमित निगरानी की जा रही है और किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए एहतियात के तौर पर स्पीड प्रतिबंध लगाया गया है।
इस तकनीकी समस्या के कारण पटना-मोकामा रेलखंड पर चलने वाली तीन ट्रेनें प्रभावित हुईं। जानकारी के अनुसार, कमला गंगा इंटरसिटी को करौटा स्टेशन पर रोकना पड़ा, जबकि गाड़ी संख्या 63222 (पटना-मोकामा मेमू पैसेंजर) और 63218 (दानापुर-मोकामा मेमू) को भी अलग-अलग स्टेशनों पर लगभग आधे घंटे तक खड़ा रहना पड़ा। इससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
रेलवे कंट्रोल रूम द्वारा विभिन्न स्टेशनों को तत्काल सूचना भेजी गई थी, जिससे ट्रेन संचालन को रोका जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ट्रैक को सुरक्षित घोषित करने के बाद ही संचालन पुनः शुरू किया गया।
रेलवे ने यात्रियों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान ट्रैक के आस-पास किसी भी प्रकार की असामान्य गतिविधि या जमीन धंसने की सूचना तत्काल रेलवे अधिकारियों को दें। रेल प्रशासन के मुताबिक, यह घटना एक प्राकृतिक कारण (heavy rainfall and soil erosion) की वजह से हुई, लेकिन समय पर उठाए गए कदमों से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहले से पहचान कर उनकी निगरानी की योजना बनाई जा रही है।