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30-Jul-2025 08:23 AM
By First Bihar
Patna Metro: पटना मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है और 15 अगस्त 2025 से प्राथमिक कॉरिडोर (6.5 किमी) पर मेट्रो दौड़ाने की तैयारी जोरों पर है। 20 जुलाई को पुणे से तीन कोच वाली मेट्रो रैक पटना पहुँची। जिसका ट्रायल रन बैरिया चक, संपतचक डिपो में शुरू हो चुका है। हालाँकि, पिछले दो दिनों से बारिश के कारण ट्रायल प्रभावित हुआ है।
डिपो में बैटरी से संचालित छोटे इंजन की मदद से सुबह और शाम को कोचों की जाँच की जा रही है और अब तक कोई तकनीकी समस्या नहीं मिली। न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल से डिपो को जोड़ने वाली लाइन और बिजली आपूर्ति का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है, जिसके बाद बिजली से ट्रायल रन शुरू होगा।
प्राथमिक कॉरिडोर और स्टेशन
प्राथमिक कॉरिडोर में पाँच स्टेशन है न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल, जीरो माइल, भूतनाथ, खेमनीचक और मलाही पकरी। शुरुआती चरण में मेट्रो न्यू पाटलिपुत्र बस टर्मिनल से भूतनाथ तक चलेगी, क्योंकि खेमनीचक स्टेशन (इंटरचेंज) का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। यह कॉरिडोर कॉरिडोर-2 (उत्तर-दक्षिण) का हिस्सा है, जो पटना जंक्शन से न्यू ISBT तक 14.45 किमी लंबा है। ट्रायल रन 6.107 किमी के इस खंड पर हो रहा है, और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन की उम्मीद है।
कोच की क्षमता और सुविधाएँ
प्रत्येक मेट्रो कोच में 300 यात्रियों की क्षमता है, जिसमें 50-55 सीटें बैठने के लिए और बाकी खड़े होने के लिए हैं। तीन कोच वाली मेट्रो में कुल 900 यात्री सफर कर सकेंगे। टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा पुणे में निर्मित ये कोच ऊर्जा-कुशल और शहरी छोटी दूरी की यात्रा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
मेट्रो में एयर-कंडीशनिंग, सीसीटीवी, वाई-फाई और चार्जिंग पॉइंट जैसी आधुनिक सुविधाएँ होंगी। किराया 0-3 किमी के लिए 15 रुपये और 3-6 किमी के लिए 30 रुपये निर्धारित किया गया है। मेट्रो सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक चलेगी। ट्रायल अगस्त के पहले सप्ताह में शुरू होने की बात कही गई है।
परियोजना की प्रगति और महत्व
पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के सहयोग से बन रही इस परियोजना की लागत 13,365.77 करोड़ रुपये है, जिसमें JICA से 5,520.93 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है। बिहार सरकार ने 115 करोड़ रुपये की फंडिंग दी, जिससे कोच, ट्रैक, लिफ्ट और एस्केलेटर खरीदे गए। डिपो में 32 तीन-कोच ट्रेनों के लिए 8 स्टेबलिंग बे, ऑटो-कोच वॉशिंग यूनिट और 2500 KVA सब-स्टेशन होगा। यह मेट्रो पटना में ट्रैफिक जाम कम करने, पर्यावरण संरक्षण और रोज़गार सृजन में योगदान देगी।