निजी गाड़ी को कमर्शियल बनाना हुआ आसान, परिवहन विभाग की नई स्कीम लागू NEET छात्रा की संदिग्ध मौत पर पटना में बवाल, मृतका के शव को लेकर सड़क पर उतरे परिजन बिहार में अपहरण के बाद महिला से गैंगरेप: आरोपी मोहम्मद जुनैद गिरफ्तार, 5 अन्य फरार, शराब पिलाकर पीड़िता से करवाया डांस मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 जनवरी से शुरू करेंगे 'समृद्धि यात्रा', देखिये पूरा शेड्यूल जमुई के मजोस-भंटा मैग्नेटाइट ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया तेज, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 'रोडशो' का आयोजन Bihar News: दरभंगा राज की महारानी कामसुंदरी देवी के अंतिम संस्कार से पहले भारी बवाल, दो पक्षों के बीच हुई जमकर मारपीट Bihar News: दरभंगा राज की महारानी कामसुंदरी देवी के अंतिम संस्कार से पहले भारी बवाल, दो पक्षों के बीच हुई जमकर मारपीट लखीसराय में GTSE सेमिनार का भव्य आयोजन, मेधावी छात्रों को किया गया सम्मानित Shikhar Dhawan Engagement: शिखर धवन ने सोफी शाइन के साथ की सगाई, फैंस को इंस्टाग्राम पर दी खुशखबरी Shikhar Dhawan Engagement: शिखर धवन ने सोफी शाइन के साथ की सगाई, फैंस को इंस्टाग्राम पर दी खुशखबरी
22-May-2025 08:29 AM
By First Bihar
Bihar News: पटना सिविल कोर्ट के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-2 ने बुधवार को आयकर विभाग पटना के पूर्व इंस्पेक्टर अरुण कुमार दत्ता को 32 वर्ष पुराने एक आपराधिक मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया। साथ ही, उनके खिलाफ स्थायी रूप से लाल वारंट भी जारी कर दिया गया है। आरोपित अरुण कुमार दत्ता पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र के मीठापुर इलाके के निवासी थे।
मालूम हो कि यह मामला वर्ष 1993 का है, जब जक्कनपुर थाने के तत्कालीन थानेदार बीके गोप ने खुद को सूचक बनाते हुए कांड संख्या 61/93 के तहत अरुण कुमार दत्ता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में दायर की थी। अदालत ने उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए समन, वारंट और यहां तक कि एसएसपी को पत्र भी भेजा था, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
कोर्ट ने आयकर विभाग, पटना को पत्र भेजकर आरोपी की जानकारी मांगी थी। जवाब में विभाग ने बताया कि अरुण कुमार दत्ता वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उनका स्थायी पता उपलब्ध नहीं है। इधर, इस मामले के सूचक तत्कालीन थानेदार बीके गोप भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। सभी प्रयासों के विफल रहने पर कोर्ट ने आरोपी को भगोड़ा घोषित करते हुए मामले का निष्पादन कर दिया। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और कानूनी प्रक्रिया के विफल क्रियान्वयन का गंभीर उदाहरण है, जहां तीन दशकों में भी एक आरोपी को न्याय के कटघरे में लाया नहीं जा सका।