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05-Aug-2025 12:00 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के तहत बड़ी गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इस दौरान कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर दो वोटर आईडी (EPIC) पंजीकृत होने की बात सामने आई है, जो कानूनन अपराध है। दो आधार कार्ड या दो पैन कार्ड रखना जितना गंभीर अपराध है, उतना ही दो वोटर आईडी कार्ड रखना भी गैरकानूनी है। इसके लिए जुर्माना और अधिकतम एक वर्ष की जेल की सजा का प्रावधान है, साथ ही मतदाता का वोट देने का अधिकार भी रद्द किया जा सकता है।
हाल ही में आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजा गया है। आरोप है कि उनके पास दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र हैं, जिसे लेकर अब कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। चुनाव आयोग ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के पहले चरण में घर-घर जाकर गणना फॉर्म का वितरण एवं संग्रहण हो चुका है। अब दूसरे चरण में दावा एवं आपत्ति (Claims and Objections) की प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत मतदाता Form-6, Form-7 और Form-8 के जरिए अपना नाम जोड़ सकते हैं, हटवा सकते हैं या उसमें सुधार कर सकते हैं।
अगर किसी मतदाता का नाम दो स्थानों पर दर्ज है, तो उन्हें सलाह दी गई है कि वे तत्काल किसी एक वोटर आईडी को रद्द करवाएं। इसके लिए संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर Form-7 भरना होगा। आयोग की अधिकारिक वेबसाइट पर भी यह प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है।
चुनाव आयोग के अनुसार, दो वोटर कार्ड रखने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 17 और 18 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसमें न सिर्फ एक साल तक की सजा का प्रावधान है, बल्कि दोषी पाए जाने पर वोट देने का अधिकार भी खत्म किया जा सकता है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने नाम, पते और मतदाता पहचान की स्थिति की सही जानकारी दें और यदि कोई गलती हो, तो तुरंत सुधार कराएं। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए बेहद अहम है।