मुंगेर में इंटर परीक्षार्थी 3 दिन से लापता, दोस्त पर अपहरण का आरोप RJD के पूर्व विधायक रियाजुल हक ने थामा JDU का दामन, लालू-तेजस्वी की पार्टी को बड़ा झटका 8 फरवरी से बिहार यात्रा पर निकलेंगे प्रशांत किशोर, हार के बाद जन सुराज को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी पूर्णिया में जमीन विवाद बनी बड़ी समस्या, शिवम मेडिकल कॉलेज निर्माण में अड़चन का आरोप नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा फैसला: बिहार में गर्ल्स हॉस्टल-लॉज के लिए नियम सख्त, 24 घंटे महिला वार्डन अनिवार्य, जानिये पूरी गाईडलाइन झारखंड के गोड्डा हॉस्टल से फरार 4 नाबालिग बच्चे जमुई स्टेशन पर बरामद, GRP ने परिजनों से मिलाया PMCH और NMCH में फ्लाइंग स्क्वायड की रेड, पकड़ा गया दलाल सफाईकर्मी टर्मिनेट बिहार से लापता 3 नाबालिग बच्चियां दिल्ली से बरामद, पुलिस ने किया परिजनों के हवाले गुलज़ारबाग़ प्रिंटिंग प्रेस के दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण बदहाली का आलम देखिये: दिन के उजाले में मरीज का मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ ईलाज
06-Aug-2025 09:05 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार और झारखंड के बीच अंतरराज्यीय बस परमिट की स्वीकृति और नवीकरण में हो रही देरी ने वाहन मालिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर बताया कि परमिट प्रक्रिया में 6 महीने से एक साल तक का समय लग रहा है, जिससे निजी बस मालिकों को प्रतिदिन लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। स्वीकृत परमिट के मूल दस्तावेज मालिकों तक नहीं पहुंच रहे और मुख्यालय से पत्र जारी होने की सूचना भी समय पर नहीं दी जा रही। इसके चलते बसें बिना परमिट के खड़ी रहती हैं, जिससे यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।
एक बड़ी समस्या यह है कि बिहार द्वारा हस्ताक्षरित परमिट को झारखंड में मान्यता नहीं मिल रही, जिसके कारण बसों को सीमा पर डिबुडीह जैसे चेकपोस्ट पर रोका जा रहा है। हाल ही में डिबुडीह में परिवहन अधिकारियों ने एक बस को जबरन रोककर चालक के साथ कथित दुर्व्यवहार किया, जिसकी निंदा INTUC श्रमिक नेता राजू अहलूवालिया ने की। उन्होंने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। फेडरेशन ने 10 अगस्त को पटना में बैठक बुलाई है, जिसमें राज्यव्यापी चक्का जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर विचार किया जाएगा।
वाहन मालिकों ने पुरानी परमिट व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें 0-5 साल पुरानी बसों के लिए 600 किमी और 5-10 साल पुरानी बसों के लिए 400 किमी की सीमा तय है। नई बसों की गुणवत्ता में सुधार के बावजूद नियम अपडेट नहीं हुए। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 79 के तहत परमिट नियमों को सरल करने की जरूरत है। बिहार परिवहन विभाग ने ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दिया है, लेकिन परमिट प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी बनी हुई है। फेडरेशन ने मांग की है कि बिहार-झारखंड के बीच समन्वय समिति बनाकर 30 दिनों के भीतर परमिट स्वीकृति सुनिश्चित की जाए।
झारखंड में भी बस मालिकों ने इसी तरह की समस्याएं उठाई हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 310 बसों का भुगतान अभी तक लंबित है और अब विधानसभा चुनाव के लिए 400 बसें मांगी गई हैं। फेस्टिव सीजन में बसों की कमी से यात्रियों को दिक्कत हो सकती है। वाहन मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो छठ पूजा जैसे व्यस्त सीजन में बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा होगी।