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29-Jan-2026 08:05 PM
By First Bihar
PATNA: राज्य में भूमि विवाद से जुड़े मामलों को लेकर अब पुलिस की मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ा आदेश जारी करते हुए कहा है कि भूमि विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है, न कि पुलिस का। न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिस की आड़ में किसी को डराया-धमकाया जाएगा.
जमीन पर कब्जा नहीं कराएगी पुलिस
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के निर्देश पर राज्य सरकार के गृह और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साझा पत्र जारी कर दिया है. इसमें कहा गया है कि भूमि विवाद के मामलों में पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहेगी. बिना कोर्ट या दूसरे सक्षम प्राधिकार के आदेश के पुलिस न तो कब्जा दिला सकेगी और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य या चहारदीवारी कराएगी.
जन संवाद में मिली शिकायतों पर कार्रवाई
विजय सिन्हा ने कहा कि भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कानून-व्यवस्था के नाम पर पुलिस द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया. इसके बाद सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस का दायित्व केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि दखल-कब्जा दिलाना, चहारदीवारी कराना या निर्माण कार्य कराना. यदि बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के किसी स्तर पर ऐसा किया गया, तो संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है.
1 फरवरी से लागू होगा फैसला
भूमि सुधार जन कल्याण संवाद से प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण के बाद राज्य सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो 1 फरवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी इन निर्देशों में थाना स्तर पर पुलिस प्रशासन की भूमिका को स्पष्ट रूप से सीमित किया गया है।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी संयुक्त पत्र में कहा गया है कि भूमि विवाद के मामलों में पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहेगी। बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के पुलिस न तो कब्जा दिला सकेगी और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य या चहारदीवारी कराएगी।
थाना डायरी में इंट्री करके जाएगी पुलिस
सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी भूमि विवाद की सूचना मिलते ही थाना द्वारा स्टेशन डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा। इसमें दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद की प्रकृति (राजस्व, सिविल या आपसी), विवादित भूमि का पूरा विवरण जैसे थाना, खाता, खेसरा, रकबा और भूमि की किस्म दर्ज करनी होगी। साथ ही पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई और यह भी स्पष्ट करना होगा कि मामला प्रथम दृष्टया किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है.
अंचलाधिकारी को पहले सूचना दें
पुलिस को भूमि विवाद के किसी मामले में दखल देने से पहले मामले की जानकारी देनी होगी. संबंधित थाना प्रभारी द्वारा अंचलाधिकारी को लिखित रूप में देना अनिवार्य किया गया है। यह सूचना ई-मेल या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से भी भेजी जा सकेगी, ताकि पुलिस और राजस्व प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
हर शनिवार संयुक्त बैठक
भूमि विवाद के त्वरित और निष्पक्ष समाधान के लिए हर शनिवार को अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक अनिवार्य होगी। इन बैठकों में मामलों की प्रगति की जानकारी विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 22 जुलाई 2025 को हुई समीक्षा बैठक के निर्देशों के अनुरूप, थाना प्रभारी स्वयं या उनकी अनुपस्थिति में अपर थाना प्रभारी (ASHO) इन बैठकों में भाग लेंगे।
धारा 107/116 की प्रक्रिया रहेगी लागू
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि धारा 107/116 दंड प्रक्रिया संहिता (BNS के समकक्ष) के तहत पुलिस की भूमिका पहले की तरह नियमानुसार बनी रहेगी। हालांकि, इसका दुरुपयोग कर भूमि विवाद में अनावश्यक हस्तक्षेप किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 के तहत ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ केवल नारा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर भूमि विवाद का समाधान कानून के दायरे में, समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से हो.जनता को भटकने नहीं दिया जाएगा और दोषी चाहे किसी भी स्तर का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा.सरकार का मानना है कि इन दिशा-निर्देशों से राज्य के करीब 4.5 करोड़ जमाबंदी धारकों को भूमि से जुड़े विवादों में पारदर्शी, संवेदनशील और त्वरित न्याय मिलेगा और जनता का प्रशासन पर भरोसा और मजबूत होगा.