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01-Aug-2025 08:32 AM
By First Bihar
Bihar News: आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के लाखों संविदा कर्मियों को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत मिड डे मील रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय में दोगुना वृद्धि की गई है। सरकार के इस निर्णय से शिक्षा विभाग से जुड़े हजारों कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका मनोबल बढ़ेगा।
दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार यानि आज सुबह अपने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि “नवंबर 2005 में सरकार बनने के बाद से उनकी प्राथमिकता में शिक्षा व्यवस्था रही है। वर्ष 2005 में जहां शिक्षा का कुल बजट मात्र ₹4,366 करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर ₹77,690 करोड़ हो गया है। उन्होंने आगे लिखा है कि सरकार द्वारा शिक्षकों की व्यापक नियुक्ति, नए विद्यालय भवनों का निर्माण, और आधारभूत संरचना के विकास से शिक्षा प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया है कि “शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में रसोइयों, रात्रि प्रहरियों तथा शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे ध्यान में रखते हुए हमलोगों ने इन कर्मियों की मानदेय राशि में सम्मानजनक वृद्धि करते हुए इसे दोगुना करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत मध्याह्न भोजन में कार्यरत रसोइयों के मानदेय में दोगुनी वृद्धि करते हुए 1650 रूपए से 3300 रूपए करने का निर्णय लिया गया है।”
वहीं माध्यमिक/उच्च शिक्षा विद्यालय में कार्यरत रात्रि प्रहरी का मानदेय 5000 रूपए से दोगुना करते हुए इसे अब 10000 रूपए करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का मानदेय 8 हजार रूपए से दोगुना करते हुए अब 16 हजार रूपए करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही इनकी वार्षिक वेतन वृद्धि 200 रूपए के स्थान पर 400 रूपए करने का निर्णय लिया गया है। इससे कार्यरत कर्मियों के मनोबल में वृद्धि होगी और वे अधिक उत्साह एवं लगन से अपने कार्यों का निष्पादन करेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इस वृद्धि से ये कर्मी और अधिक प्रेरणा, समर्पण और उत्साह से अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। इससे पूर्व, राज्य सरकार ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की थी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार जनकल्याणकारी नीतियों पर फोकस कर रही है, खासकर चुनाव से पहले संविदा कर्मियों को साधने के लिए।