मुंगेर में इंटर परीक्षार्थी 3 दिन से लापता, दोस्त पर अपहरण का आरोप RJD के पूर्व विधायक रियाजुल हक ने थामा JDU का दामन, लालू-तेजस्वी की पार्टी को बड़ा झटका 8 फरवरी से बिहार यात्रा पर निकलेंगे प्रशांत किशोर, हार के बाद जन सुराज को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी पूर्णिया में जमीन विवाद बनी बड़ी समस्या, शिवम मेडिकल कॉलेज निर्माण में अड़चन का आरोप नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा फैसला: बिहार में गर्ल्स हॉस्टल-लॉज के लिए नियम सख्त, 24 घंटे महिला वार्डन अनिवार्य, जानिये पूरी गाईडलाइन झारखंड के गोड्डा हॉस्टल से फरार 4 नाबालिग बच्चे जमुई स्टेशन पर बरामद, GRP ने परिजनों से मिलाया PMCH और NMCH में फ्लाइंग स्क्वायड की रेड, पकड़ा गया दलाल सफाईकर्मी टर्मिनेट बिहार से लापता 3 नाबालिग बच्चियां दिल्ली से बरामद, पुलिस ने किया परिजनों के हवाले गुलज़ारबाग़ प्रिंटिंग प्रेस के दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण बदहाली का आलम देखिये: दिन के उजाले में मरीज का मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ ईलाज
28-Jul-2025 09:17 PM
By First Bihar
PATNA: पटना के मसौढ़ी अंचल से संबंधित ‘डॉग बाबू’ के नाम से एक आवास प्रमाण-पत्र जारी करने के मामले में पटना जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक अधिकारी के निलंबन की अनुशंसा की है, वहीं एक अन्य कर्मी को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने पटना जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम को इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
शुरुआती जांच में पता चला है कि दिल्ली की एक महिला के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर विगत 15 जुलाई को ऑनलाइन आवेदन किया गया था। आवेदन में दिए गए कागजातों का बिना सत्यापन किए ही आवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में आईटी सहायक और राजस्व अधिकारी, दोनों को दोषी पाया गया है। इन पर गलत डिजिटल हस्ताक्षर करने और नियमों की अनदेखी करने का भी आरोप है। इसके अलावा जिस व्यक्ति की पहचान पत्र का दुरुपयोग किया गया है, वह भी जांच के दायरे में है।
इस मामले की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए। इस मामले में राजस्व अधिकारी मुरारी चौहान को निलंबित करने की अनुशंसा जिलाधिकारी ने कर दी है। वहीं, आईटी सहायक को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा अज्ञात आवेदक और दोनों अधिकारियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
फिलहाल यह मामला पुलिस अनुसंधान में है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। ‘डॉग बाबू’ के आवास प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया गया है। बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी ने सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि NIC के सर्विस प्लस पोर्टल पर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जाए। साथ ही जल्द ही इस पोर्टल पर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद लेने की बाट कही गई है ताकि आगे किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। यह मामला न केवल सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बिहार सरकार अब डिजिटल धोखाधड़ी पर कड़ी नजर रखे हुए है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।