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30-Jul-2025 02:02 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्यभर में कार्यरत 94,664 आशा कार्यकर्ताओं और 5,203 ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में भारी बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 26,325 नई आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति का फैसला भी लिया गया है। यह घोषणा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अब आशा कार्यकर्ताओं को ₹1,000 की जगह ₹3,000 प्रति माह मानदेय मिलेगा, जबकि ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव प्रोत्साहन राशि ₹300 से बढ़ाकर ₹600 कर दी गई है। यह कदम उनके कठिन कार्यों को मान्यता देने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। आशा और ममता कार्यकर्ता वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसे कार्यक्रमों को धरातल पर लागू कर रही हैं।
सम्राट चौधरी ने यह भी बताया कि हाल ही में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि ₹600 से बढ़ाकर ₹1,100 प्रति माह की गई थी, जिससे राज्य के लगभग 1.11 करोड़ लाभार्थियों को सीधा लाभ मिला। यह निर्णय राज्य सरकार की सामाजिक कल्याण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम केवल एक आर्थिक सहायता नहीं बल्कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मनोबल और प्रेरणा को भी बढ़ाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार सरकार लगातार कमजोर वर्गों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर बड़े फैसले ले रही है। 27 जुलाई को लिए गए एक अन्य निर्णय में राज्य सरकार ने सफाई आयोग के गठन का निर्णय लिया, जिससे 263 नगर निकायों के 4 लाख से अधिक सफाई कर्मियों को उनकी समस्याओं से राहत मिलेगी।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राज्य सरकार ने हाल ही में हर परिवार को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना लागू की है, जिससे 1.65 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना जैसे कार्यक्रमों ने गरीबों को सशक्त किया है। इन योजनाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजनाएं बिहार में सामाजिक सुरक्षा के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों की दशकों पुरानी मांग को भी पूरा करेगा, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।