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28-Jan-2026 02:09 PM
By First Bihar
Bihar land news : राज्य में फौज में कार्यरत जवानों, अर्धसैनिक बलों, नागरिक सुरक्षा में लगे कर्मियों और उनके परिजनों के भूमि संबंधी मामलों को लेकर सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब ऐसे लोगों की जमीन से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी, नामांतरण, दाखिल-खारिज, सीमांकन या विवाद के मामलों में कोई समय-सीमा का बंधन नहीं होगा, बल्कि तत्काल प्रभाव से प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाएगा।
इस संबंध में विभागीय स्तर पर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने प्रमुख सचिव को आदेश दिया है कि वे तुरंत प्रभाव से एक आधिकारिक पत्र जारी करें, जिसमें यह साफ लिखा हो कि सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, नागरिक सुरक्षा में कार्यरत कर्मियों, शहीद जवानों की विधवाओं और उनके आश्रितों के भूमि मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि जो लोग देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहते हैं, वे अक्सर अपने निजी कामों, खासकर जमीन से जुड़े मामलों पर ध्यान नहीं दे पाते। इसी का फायदा उठाकर कई बार स्थानीय स्तर पर कुछ लोग या कर्मचारी उनकी जमीन में गड़बड़ी कर देते हैं। ऐसे मामलों में अब किसी भी तरह की लापरवाही या टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि किसी सैन्यकर्मी, सुरक्षाबल के जवान या विधवा महिला की जमीन में जानबूझकर गड़बड़ी की जाती है, तो संबंधित लोगों की पहचान कर चयनित रूप से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसमें चाहे वह आम व्यक्ति हो या सरकारी कर्मचारी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और संबंधित पदाधिकारी ऐसे मामलों को “अति संवेदनशील” श्रेणी में रखें। शिकायत मिलते ही तुरंत जांच शुरू करें और बिना अनावश्यक प्रक्रिया के समस्या का समाधान करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो उस अधिकारी या कर्मचारी पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विशेष रूप से सैन्य विधवाओं और शहीद जवानों के परिजनों के मामलों को लेकर सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पीड़ित परिवारों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें सम्मान के साथ त्वरित न्याय मिले।
सरकार का कहना है कि यह फैसला केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है, जो देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हैं। भूमि विवादों में फंसकर उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़े, यह किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश सभी जिलों, अनुमंडलों और अंचलों को भेजे जाएंगे। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों की अलग से मॉनिटरिंग की जाए और उच्च स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो।
सरकार के इस फैसले से फौज, सुरक्षा बलों और उनके परिवारों में राहत की उम्मीद जगी है। माना जा रहा है कि इससे न केवल भूमि विवादों में तेजी से समाधान होगा, बल्कि गड़बड़ी करने वालों पर भी सख्त लगाम लगेगी।