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09-Mar-2026 08:46 AM
By First Bihar
Bihar politics : बिहार की राजनीति इन दिनों बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है और राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो चुका है। इस बीच भाजपा के स्टेट हेड ने इशारों में यह कह दिया है कि राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है और 16 मार्च के बाद बिहार को नई सरकार मिल सकती है।
दरअसल, हाल के दिनों में मुख्यमंत्री Nitish Kumar को लेकर चर्चाएं तेज हुई। नीतीश कुमार राज्यसभा की राजनीति की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार लंबे समय से एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं। उन्होंने कई बार सत्ता की कमान संभाली और अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के साथ सरकार बनाई। लेकिन इस बार परिस्थितियां कुछ अलग दिखाई दे रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार राज्यसभा की ओर जाते हैं, तो बिहार की सत्ता की बागडोर किस नए चेहरे को सौंपी जा सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस संभावित बदलाव के पीछे राष्ट्रीय स्तर की रणनीति भी हो सकती है। भाजपा और जेडीयू के बीच संबंधों को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसी चर्चा है कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री देखने को मिल सकता है। हालांकि इस पर अभी तक आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सियासी हलकों में इसकी चर्चा जोरों पर है।
इधर विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। राष्ट्रीय जनता दल की नेता Rabri Devi ने भी हाल ही में बयान देते हुए कहा था कि नीतीश कुमार को बिहार छोड़कर नहीं जाना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में चुना है और उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए।
इसी बीच बिहार में प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखने को मिली है। हाल ही में केंद्र सरकार ने Syed Ata Hasnain को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। नए राज्यपाल की नियुक्ति को भी राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 16 मार्च बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम तारीख साबित हो सकती है। राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुन लिए जाएंगे ऐसे में मुख्यमंत्री पद से उनका इस्तीफा लगभग इसी दिन तय माना जा रहा है। इसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी और संभव है कि भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बने।
फिलहाल बिहार की जनता और राजनीतिक दलों की नजर 16 मार्च पर टिकी हुई है। उस दिन यह साफ हो जाएगा कि बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक फैसले न सिर्फ बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं।