1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 28, 2025, 7:08:46 PM
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Holi 2025: महाकुंभ के विशेष कालखंड का महाशिरात्रि के समापन के साथ ही अब पर्यटकों में बनारस की मसान होली का क्रेज काफी बढ़ गया है। काशी, प्रयागराज और अयोध्या के त्रिकोण ने बनारस आने वाले पर्यटकों को नई दिशा दी है। जिसके कारण रंगों के त्यौहार होली को लेकर पर्यटक काफी उत्साहित होई और बनासस में होली से पहले 12 मार्च तक होटल, क्रूज और नावों की बुकिंग फुल हैं इसमें अधिक संख्या में ऑनलाइन बुकिंग महानगरों और कॉरपोरेट घरानों के अलावा महिला ग्रुपों ने कराई है।
खास तौर से महिलाओं की पसंद गंगा किनारे बसे होटल हैं। गंगा घाट किनारे के होटलों में मुहमांगी कीमत होने के बावजूद होटलों के कमरों के साथ क्रूज और नावों की भी बुकिंग होना अब मुश्किल हो गई है। पर्यटकों की मांग पूरी करने के लिए टूर ऑपरेटरों को आसपास के जिलों से छोटे चार पहिया वाहन मंगाने पड़ रहे हैं।
आपकों बता दें कि बनारस में पांच दिनों तक मसान की होली और विश्वनाथ बाबा की गौना बारात का उत्सव चलेगा। इस साल 14 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा, और संयोग से यह शुक्रवार के दिन पड़ रहा है। इससे लोगों को लॉन्ग वीकेंड का शानदार मौका मिल गया है। इससे पहले महाकुंभ के 45 दिनों में प्रतिदिन औसत सात लाख लोग प्रतिदिन काशी आए।
महाकुंभ में शामिल होने के साथ-साथ करीब तीन करोड़ से ज्यामदा लोग काशी की धार्मिक यात्रा की। ऐसे में पर्यटन कारोबार में काफी बढ़ोतरी हुआ है। होटल-गेस्टग हाउस से लेकर रेस्टोसरेंट, माला-फूल और पूजन सामग्री बेचने वाले ठेले-खोमचे, रिक्शाट-ईरिक्शा, नाविकों, साड़ी और हस्तुशिल्प विक्रताओं की जेबें तो भरी ही, घी-तेल और किराना कारोबारी भी कमाकर लाल हो गए।
बनारस में बाबा विश्वनाथ के गौना बारात और मसाने की होली के अदभुत दृश्य के साक्षी बनने जा रहें हैं, जिसके लिए महानगरों के कारोबारियों के अलावा खासकर दक्षिण भारतीय पर्यटकों की समूहों की बुकिंग से 12 मार्च तक शहर के करीब एक हजार छोटे-बड़े होटल, लॉज, गेस्टक हाउस हाउस फुल हो चुके हैं। गंगा में करीब दो हजार नाव-बजड़े और क्रूज भी ऑफलाइन और ऑनलाइन होली से पहले तक बुक हो चुके हैं।
वहीं पर्यटक कारोबारियों का मानना है कि पर्यटन व्यकवसाय में होली के बाद एक बार फिर तेजी रामनवमी के मौके पर अप्रैल के महीने में आएगी। रामनवमी और उससे पहले अयोध्याज में रामलला का दर्शन करने देश के कोने-कोने से लोग आएंगे। बेहतर संसाधन उपलब्धस होने से अधिकतर लोग बनारस को केंद्र में रखकर अयोध्याे और अन्य जगहों पर आवाजाही करेंगे।