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संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा, TMC के बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्ष का वॉकआउट

Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में TMC के बागी सांसदों की नई पार्टी NCPI को बुलाने पर विपक्ष ने विरोध जताते हुए वॉकआउट किया। बाद में विपक्ष बैठक में फिर शामिल हो गया।

Parliament Monsoon Session
सर्वदलीय बैठक में हंगामा
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Parliament Monsoon Session: 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को दिल्ली में आयोजित सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बागी सांसदों की नई पार्टी NCPI को भी बैठक का निमंत्रण दिया, जिस पर विपक्ष ने विरोध जताते हुए सांकेतिक रूप से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ समय बाद विपक्षी दल फिर बैठक में शामिल हो गए।



विपक्ष का कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक टीएमसी के बागी सांसदों की नई पार्टी NCPI को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। ऐसे में बिना मान्यता वाली पार्टी को सर्वदलीय बैठक में बुलाने का कोई आधार नहीं है। विपक्ष ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। बैठक से पहले बागी सांसदों ने भी मांग की थी कि उन्हें मुख्य टीएमसी सांसदों के साथ न बैठाया जाए। उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए उनके लिए अलग बेंचों पर बैठने की व्यवस्था की गई।



टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (UBT) समेत पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने कहा कि टेबल ऑफिस की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या अभी भी 28 दिखाई गई है, जबकि बागी 20 सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है और उनकी सदस्यता समाप्त करने से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं।



महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग संसदीय समूह बनाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने इन 20 बागी सांसदों को किस आधार पर सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।



वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माझी ने बीजेपी पर विपक्षी दलों के सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी भी आवश्यक संख्या पूरी नहीं है, इसलिए उसे विपक्षी गठबंधन INDIA पर निर्भर रहना पड़ सकता है।



महुआ माझी ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं। उन्होंने कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा दिलाती है कि किसी राज्य की सीटों को नुकसान नहीं होगा और सभी विपक्षी दल सहमत होंगे, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है।



बता दें कि इस बार संसद के मॉनसून सत्र में सरकार का मुख्य फोकस कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर रहेगा। सरकार परिसीमन विधेयक, महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा आगे बढ़ाना चाहती है। वहीं, विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह संसद में E20 विवाद, महंगाई, विदेश नीति और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता