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दुबई पहुंचते ही खराब हुई मुजफ्फरपुर की शाही लीची, 40 दिन ताजा रखने का प्रयोग फेल; बिक्री की नहीं मिली मंजूरी

Bihar News: मुजफ्फरपुर की लीची को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए किया गया नया प्रयोग सफल नहीं हो सका। खास तकनीक से तैयार कर दुबई भेजी गई लीची पर सफेद दाग मिलने के बाद उसे बाजार में बिक्री की अनुमति नहीं मिली। अब वैज्ञानिक शाही लीची पर आगे परीक्षण...

दुबई पहुंचते ही खराब हुई मुजफ्फरपुर की शाही लीची, 40 दिन ताजा रखने का प्रयोग फेल; बिक्री की नहीं मिली मंजूरी
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार की मशहूर मुजफ्फरपुर लीची को 40 दिनों तक ताजा रखने का दावा इस बार सफल नहीं हो सका. मेडागास्कर की एक खास तकनीक से तैयार कर दुबई भेजी गई चाइना किस्म की लीची वहां पहुंचते ही गुणवत्ता जांच में फेल हो गई. फलों पर सफेद दाग मिलने के बाद दुबई के अधिकारियों ने उसे बाजार में बेचने की अनुमति नहीं दी. इसके चलते पूरी खेप बाजार तक नहीं पहुंच सकी.


जानकारी के अनुसार, लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए मेडागास्कर के वैज्ञानिक एरिक की सल्फर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. इसी तकनीक से चाइना किस्म की लीची को प्रोसेस कर दुबई भेजा गया था. उम्मीद थी कि लीची करीब 40 दिनों तक ताजा बनी रहेगी, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे.


15 जून को मुजफ्फरपुर के अलग-अलग बागानों से करीब 20 टन लीची एकत्र की गई थी. इसके बाद विज्रो कंपनी ने विशेष प्रोसेसिंग यूनिट में लीची को तैयार किया. 17 जून को करीब साढ़े आठ टन लीची को विशेष वाहन से मुंबई भेजा गया, जहां से उसे समुद्री जहाज के जरिए दुबई रवाना किया गया. वहीं करीब डेढ़ टन लीची राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में परीक्षण के लिए रखी गई.


करीब 7 जुलाई को जब लीची दुबई पहुंची तो जांच के दौरान फलों पर सफेद दाग दिखाई दिए. इसी वजह से अधिकारियों ने इसे बिक्री के लिए उपयुक्त नहीं माना. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में रखे गए नमूनों में भी इसी तरह के सफेद दाग मिले, जिससे साफ हो गया कि यह तकनीक चाइना किस्म की लीची पर सफल नहीं रही.


राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि सल्फर आधारित प्रसंस्करण तकनीक नई नहीं है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तय मात्रा तक इसका इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने कहा कि इस बार चाइना किस्म की लीची पर किए गए परीक्षण में उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले. हालांकि शाही लीची पर पहले बेहतर परिणाम मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि अगर अगले सीजन में शाही लीची पर फिर से ट्रायल किया जाता है तो अनुसंधान केंद्र तकनीकी सहयोग देने के लिए तैयार रहेगा.