'CM नहीं अधिकारी ही फिल्ड में जाकर करेंगे काम' DM कृष्णैया की पत्नी बोली ... बिहार सरकार ने नहीं सुनी मांग

'CM नहीं अधिकारी ही फिल्ड में जाकर करेंगे काम' DM कृष्णैया की पत्नी बोली ... बिहार सरकार ने नहीं सुनी मांग

PATNA : बिहार के पूर्व सांसद बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई का गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की पत्नी के तरफ से जोरदार विरोध किया जा रहा है। उनके तरफ से इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गयी है। जिसमें 8 मई को सुनवाई भी होनी है। वहीं, दूसरी तरफ आनंद मोहन की रिहाई के बाद आईएएस के परिवार के पुराने जख्मों को कुरेदा गया है। जी कृष्णैया की पत्नी ने कहा कि चीफ मिनिस्टर फील्ड में जाकर काम नहीं करेंगे। जबकि आनंद मोहन  का परिवार आपसे मिलना चाहता है तो उन्होंने कहा कि मैं उन लोगों से क्यों मिलूं। 


दरअसल, गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की पत्नी ने कहा कि, मैंने आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से अपील नहीं की है बल्कि आईएएस अफसरों ने की है, लड़ाई वही लड़ रहे हैं। पति की मौत के बाद परिवार को चलाने के लिए लेक्चरर की नौकरी की थी। इस दौरान दो बार बड़ी बेटी का एक्सीडेंट हुआ। दो बार छोटी बेटी का भी एक्सीडेंट हुआ। मैं खुद भी कोरोना में 26 दिनों तक आईसीयू में रह गई। बच्चे बहुत रोते थे।लेकिन, आखिकार हमारी जीत हुई। 


इसके आलावा पति की मौत के बाद सरकार के तरफ से मिलने वाली मदद को लेकर उन्होंने कहा कि, पति की मौत के बाद बिहार सरकार ने दोनों बेटियों को पांच-पांच लाख रुपये दिए थे। 14 लाख रुपये घर बनाने के लिए मिले थे. इसके अलावा कुछ नहीं मिला था। मैंने तो सरकार से एक ही निवेदन किया कि मेरे पति को जितनी सैलरी मिलती थी, उतनी ही मदद मुझे मिलनी चाहिए। मगर बिहार सरकार ने मांग नहीं मानी। मुझे मालूम नहीं था कि अनुकंपा पर जॉब मिलेगी या नहीं? चार-पांच साल बहुत दिक्कत में रही।


इसके आलावा सरकार से तरफ से अपनी मांग पर उन्होंने कहा कि, मुझे सरकार से कुछ नहीं चाहिए। भगवान ने मुझे जो दिया, उसे स्वीकार कर लिया। मगर सरकार को आईएएस और आईपीएस अफसरों का मनोबल बढ़ाने वाला निर्णय लेना चाहिए। दोबारा ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। चीफ मिनिस्टर फील्ड में जाकर काम नहीं करेंगे।


जबकि, आनंद मोहन के परिवार के तरफ से मुलाकात की कोशिश पर उन्होंने कहा कि , मैं अब उनसे क्यों मिलूं? कोई मतलब नहीं है मिलने का। आनंद मोहन से लड़ने का न तो मेरे पास टाइम है, न ही मेरे अंदर धैर्य है। आनंद मोहन जेल में रहें या बाहर रहें उन्हें क्या कमी है? उन्हें क्या फर्क पड़ता है? हम तो उनके साथ  लड़ भी नहीं सकतें हैं। 


आपको बताते चलें कि, आनंद मोहन समेत 27 दोषियों की रिहाई के आदेश बिहार सरकार के तरफ से 25 अप्रैल को जारी कर दिए गए। 27 अप्रैल को आनंद मोहन की रिहाई हुई थी। आनंद मोहन पर 3 और केस चल रहे हैं। इनमें उन्हें पहले से बेल मिल चुकी है। इससे पहले 10 अप्रैल 2023 को जेल मैनुअल से ‘काम पर तैनात सरकारी सेवक की हत्या’ अंश को हटा दिया गया। इसी से आनंद मोहन या उनके जैसे अन्य कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।