बिहार कांग्रेस में पिछड़ों की उपेक्षा पर मचा घमासान, बैठक के बीच नेता ने दिया इस्तीफा, 52 फीसदी आबादी वाले पिछड़ों को नकारने का आरोप

बिहार कांग्रेस में पिछड़ों की उपेक्षा पर मचा घमासान, बैठक के बीच नेता ने दिया इस्तीफा, 52 फीसदी आबादी वाले पिछड़ों को नकारने का आरोप

PATNA : बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में पिछडों की उपेक्षा के खिलाफ विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. आलम ये है कि कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल की मौजूदगी में एक कांग्रेसी नेता ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस में ये सवाल पूछे जाने लगा है कि क्यों 52 फीसदी की आबादी वाले पिछडो को पार्टी ने पूरी तरह से नकार दिया है. आरोप ये है कि कांग्रेस अगड़ों, दलितों और मुसलमानों के अलावा किसी को कोई तवज्जो ही नहीं दे रही है.


कांग्रेस की बैठक में नेता का इस्तीफा
कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि पिछले सप्ताह बिहार कांग्रेस की चुनाव समिति और प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पिछड़ों को नकारने का मामला छाया रहा. बैठक में कांग्रेस नेता कैलाश पाल ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का एलान कर दिया. दरअसल वे पार्टी में पिछड़े वर्ग के नेताओं को नकारने पर आक्रोश जता रहे थे लेकिन उन्हें बोलने से रोक दिया गया. इसके बाद नाराज होकर कैलाश पाल ने इस्तीफे का एलान कर दिया.


सूत्र बता रहे हैं कि शक्ति सिंह गोहिल की बैठक में बिहार प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष गुंजन पटेल ने पूछा कि कांग्रेस कैसे बिहार में सत्ता में वापसी की बात कर सकती है जब उसने 52 फीसदी आबादी वाले वर्ग को खुद से अलग कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा ने पिछडे वर्ग के नेताओं की उपेक्षा का मामला उठाया. हालांकि प्रदेश कांग्रेस के नेता इस नाराजगी को टिकट के लिए मारामारी करार दे रहे हैं लेकिन पार्टी के एक बडे वर्ग का मानना है कि इससे कांग्रेस की चुनाव में मुसीबतें बढ़ सकती हैं.


कांग्रेस के पदों से इस्तीफा देने वाले कैलाश पाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सामाजिक समीकरणों पर कोई ध्यान ही नहीं दिया. वे इसका उदाहरण दे सकते हैं. 2015 में जब महागठबंधन की सरकार बनी तो कांग्रेस को मंत्री के चार पद मिले. इनमें से दो अगड़ों को दिया गया बाकी बचे दो में एक-एक दलित और मुस्लिम तबके को दिया गया.


कैलाश पाल ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बदलने के बाद प्रदेश कांग्रेस में फेर बदल किया गया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अगडी जाति से आते हैं. हमने चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाया. उनमें से भी दो अगडी जाति के हैं और एक-एक दलित और मुसलमान हैं. प्रदेश कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष भी अगडी जाति से आते हैं.


कैलाश पाल ने कहा कि अगर कांग्रेस की रणनीति अगडी जाति के वोटरों को वापस अपने खेमे में लाने की है जो बीजेपी के साथ चले गये हैं तो कोई बात नहीं. लेकिन तब कांग्रेस आरजेडी के साथ गठबंधन में क्यों हैं क्योंकि अगडी जाति के लोग आरजेडी के साथ जाने को कतई तैयार नहीं हैं.


कांग्रेस के एक और नेता ने बताया कि पार्टी ने 2015 में 41 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये. उनमें से सिर्फ 5 टिकट पिछडे वर्ग के उम्मीदवारों को दिये गये. कांग्रेस के नेता का कहना था कि एक ओर जहां बीजेपी सभी वर्गों तक अपनी पहुंच बनाने में लगी है वहीं हमारी पार्टी में पिछडे वर्ग के नेताओं को नकारा जा रहा है. पिछले तीन दशकों में कांग्रेस ने अपने आधार को बढ़ाने की कोई कोशिश नहीं है. कांग्रेस पिछड़ों के वोट के लिए आरजेडी पर निर्भर हो कर रह गयी है.


कांग्रेस के एक और नेता ने कहा कि बिहार में विपक्षी NDA में नीतीश कुमार पिछडों और अति पिछड़ों की राजनीति करते हैं. इसके बावजूद बीजेपी ने पिछडे वोट का ठेका नीतीश कुमार को नहीं दे दिया है. बीजेपी लगातार अति पिछड़ों में अपना आधार बढ़ाने की कवायद में लगी है. कांग्रस को अपनी चुनावी रणनीति तैयार करने से पहले बीजेपी की रणनीति को समझ लेना चाहिये.