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Waqf Property : कुतुब मीनार से हुमायूं का मकबरा तक, अब वक्फ का दावा खत्म ?

Waqf Property : केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक स्मारकों पर वक्फ बोर्ड के दावों को खत्म करने का फैसला लिया है। नए संशोधन के तहत कुतुब मीनार, पुराना किला, हुमायूं का मकबरा जैसे सैकड़ों संरक्षित स्मारक अब पूरी तरह सरकार के अधीन होंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
© Google
Nitish Kumar
Nitish Kumar
3 मिनट

Waqf Property: वक्फ संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन बिल को लोकसभा में बहुमत से मंजूरी मिल गई है। इस बिल के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। अब यह बिल राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया है |

इस संशोधन के तहत कई अहम बदलाव किए गए हैं। पहला बड़ा बदलाव यह है कि अब ASI के अंतर्गत  ऐतिहासिक स्मारकों जैसे पुराना किला, कुतुब मीनार और हुमायूं का मकबरा को पूरी तरह से सरकारी संपत्ति माना जाएगा और इन पर किसी अन्य संस्था का दावा नहीं होगा। दूसरा बड़ा संशोधन आदिवासी इलाकों की जमीन को लेकर किया गया है। अब इन क्षेत्रों की जमीन को वक्फ संपत्ति में तब्दील नहीं किया जा सकेगा, जिससे आदिवासी समुदाय के अधिकार और उनकी संस्कृति की रक्षा होगी। इसके अलावा, सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि सेक्शन 40 को हटा दिया गया है, जो पहले वक्फ बोर्ड को यह अधिकार देता था कि वह किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता था और उसका निर्णय अंतिम माना जाता था। सरकार का मानना है कि इस संशोधन से दुरुपयोग की संभावना कम होगी।


राज्यसभा में इस बिल के पास होने के लिए 118 वोटों की जरूरत होगी। फिलहाल, बीजेपी के पास 96 सीटें हैं और एनडीए के सहयोगी दलों को मिलाकर यह संख्या 113 तक पहुंचती है। छह मनोनीत सांसदों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 119 हो सकता है, जो बहुमत से थोड़ा अधिक है। दूसरी ओर, विपक्ष के पास कांग्रेस के 27 और अन्य दलों के 58 सांसदों को मिलाकर कुल 85 वोट हैं। अगर कुछ सांसद अनुपस्थित रहते हैं या विरोध में वोट डालते हैं, तो समीकरण बदल सकता है। लोकसभा में यह बिल 12 घंटे की लंबी बहस के बाद पारित हुआ था। अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं, जहां इसके पारित होने या रुकने का फैसला होगा।

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