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Thailand-Cambodia Conflict: कंबोडिया और थाईलैंड में जंग तेज, एक F-16 तबाह; अब तक 9 की मौत

Thailand-Cambodia Conflict: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर तनाव चरम पर है। कंबोडिया ने थाईलैंड के F-16 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया है, जबकि दोनों देशों में भीषण गोलीबारी और हवाई हमले जारी हैं।

Thailand-Cambodia Conflict
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Thailand-Cambodia Conflict: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर से हिंसक रूप ले चुका है। दोनों देशों के बीच जारी हमलों में अब कंबोडिया ने दावा किया है कि उसने थाईलैंड के एक F-16 फाइटर जेट को मार गिराया है, ऐसा तब हुआ जब थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर छह F-16 जेट्स से हवाई हमले किए। यह संघर्ष विशेष तौर पर ता मुएन थॉम, ता क्राबेई, मोम बेई और प्रेह विहेयर मंदिर जैसे विवादित क्षेत्रों में केंद्रित है। कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट ने थाई सेना पर हमले शुरू करने का आरोप लगाया है, जबकि थाईलैंड का कहना है कि कंबोडिया ने ड्रोन और रॉकेट हमलों के जरिए उकसावे की कार्रवाई की थी। इस तनाव ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जिसमें अब तक नौ लोगों के मारे जाने की खबर है।


कंबोडिया के नेतृत्व ने इस संघर्ष को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है। प्रधानमंत्री हुन मानेट ने कहा कि कंबोडिया हमेशा शांति चाहता है, लेकिन थाईलैंड की आक्रामकता के जवाब में बलपूर्वक कार्रवाई करना उसकी मजबूरी है। कंबोडियाई सेना ने थाई हमलों का जवाब रॉकेट और आर्टिलरी फायर से दिया, जिससे सीमा क्षेत्र में 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। दूसरी ओर थाईलैंड ने अपनी “चकपोंग फुवनात सैन्य रणनीति” को फिर से लागू किया है। जो कि 2008-2011 के प्रेह विहेयर मंदिर विवाद में भी इस्तेमाल हुई थी। इस रणनीति के तहत थाई सेना ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसे कंबोडिया ने अपनी अखंडता का उल्लंघन बताया है।


इस संघर्ष की जड़ प्रेह विहेयर मंदिर और आसपास के क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना था, लेकिन आसपास की सीमाओं पर दोनों देशों के दावे बरकरार हैं। 2008 में यूनेस्को द्वारा मंदिर को विश्व धरोहर घोषित करने के बाद तनाव और बढ़ा, जिसके परिणामस्वरूप 2011 में बड़े पैमाने पर झड़पें हुई थीं। हाल के महीनों में ड्रोन और बारूदी सुरंगों से जुड़े विवादों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर उकसावे का आरोप लगाया है और इनके बीच कूटनीतिक संबंधों में कमी और राजदूतों की वापसी ने शांति की संभावनाओं को और भी कम कर दिया है।


दोनों देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। कंबोडिया के पूर्व नेता और सीनेट अध्यक्ष हुन सेन ने नागरिकों से घबराहट में राशन जमा करने या कीमतें बढ़ाने से बचने को कहा, जबकि थाईलैंड ने अपने नागरिकों से कंबोडिया छोड़ने का आग्रह किया है। यह संघर्ष न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव को कम करने के लिए हस्तक्षेप की संभावना तलाश रहा है, लेकिन जब तक दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार नहीं होते, स्थिति गंभीर ही बनी रहेगी

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