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IAS Santosh Verma: सवर्ण बेटियों को लेकर विवादित टिप्पणी, IAS संतोष वर्मा घिरे; कार्रवाई की उठी आवाज

IAS Santosh Verma: अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (अजाक्स) के नवनिर्वाचित प्रांताध्यक्ष एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा अपने एक विवादित बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक घेराबंदी में आ गए हैं।

IAS Santosh Verma: सवर्ण बेटियों को लेकर विवादित टिप्पणी, IAS संतोष वर्मा घिरे; कार्रवाई की उठी आवाज
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

IAS Santosh Verma: अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (अजाक्स) के नवनिर्वाचित प्रांताध्यक्ष एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा अपने एक विवादित बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक घेराबंदी में आ गए हैं। प्रांतीय अधिवेशन के दौरान उन्होंने सवर्ण समुदाय की बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी के माध्यम से आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध करते हुए कहा कि “यह आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं कर दे या उससे संबंध नहीं बना दे।”


उनके इस कथन के बाहर आते ही कर्मचारी संगठनों, सामाजिक समूहों और कई सवर्ण संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बयान को न केवल “असंवेदनशील” और “सामुदायिक सौहार्द भंग करने वाला” बताया जा रहा है, बल्कि इसे लैंगिक असम्मान, जातिगत विभाजन और कथा-भाषा की अनुचितता का उदाहरण भी माना जा रहा है।


मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक और तृतीय कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने संयुक्त बयान में कहा कि संतोष वर्मा का यह वक्तव्य न केवल सवर्ण समुदाय का अपमान है, बल्कि महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध भी है। उन्होंने कहा- "शादी विवाह निजी जीवन का प्रश्न है। हर वयस्क अपनी पसंद से विवाह करने के लिए स्वतंत्र है। बेटी कोई वस्तु नहीं जिसे ‘दान’ करने जैसी भाषा में प्रस्तुत किया जाए। संगठनों का कहना है कि यह बयान प्रशासनिक मर्यादा, संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सभ्यता तीनों के खिलाफ है।"


IAS अधिकारी के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बवाल और बढ़ गया है। कई उपयोगकर्ताओं ने इस बयान को “जाति आधारित राजनीति को भड़काने वाला”, “महिलाओं के प्रति अवमाननापूर्ण” और “अधिकारवादी मानसिकता का उदाहरण” बताया है। कुछ संगठनों ने मुख्य सचिव और कार्मिक विभाग से संतोष वर्मा पर विभागीय कार्रवाई, स्पष्टीकरण और संभावित शो-कॉज नोटिस जारी करने की मांग भी की है।


संतोष वर्मा का बयान उस समय आया है जब राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर EWS (Economic Weaker Sections) आरक्षण को लेकर बहस तेज है। कई संगठनों का मानना है कि जाति आधारित आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण बढ़ाया जाए, जबकि SC-ST संगठनों का तर्क है कि ऐसा करने से ऐतिहासिक अधिकारों और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा।


इसी संदर्भ में वर्मा ने अपने भाषण में यह विवादित टिप्पणी कर दी, जो अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है।