1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 12, 2026, 5:22:23 PM
- फ़ोटो
Bihar News: बिहार के बक्सर जिले के राजगढ़ और आसपास के गांवों के चार युवक रोजगार की तलाश में कंबोडिया गए थे, लेकिन अब वहां फंस गए हैं। पिछले करीब 25 दिनों से इन युवकों से परिवार का ठीक से संपर्क नहीं हो पा रहा है। कभी-कभी सिर्फ वॉइस मैसेज के जरिए पैसों की मांग की जा रही है। इससे परिवार के लोग बेहद परेशान और चिंतित हैं।
परिजनों को आशंका है कि युवकों को वहां साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए काम करने का दबाव बनाया जा रहा था। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनके पासपोर्ट और जरूरी कागजात जब्त कर लिए गए और उन्हें बंद कर दिया गया।
रोजगार के झांसे में गए थे विदेश
मिली जानकारी के अनुसार, कोरान सराय थाना क्षेत्र के स्थानीय गांव निवासी सुखदेव सिंह के बेटे गोविंद सिंह 3 जनवरी 2026 को रोजगार के लिए कंबोडिया गए थे। उनके साथ कड़सर गांव निवासी कृष्णानंद चौधरी के बेटे विनोद कुमार चौधरी भी गए थे।
इसके अलावा भोजपुर जिले के तीयर थाना क्षेत्र के मनुडिहरी गांव निवासी हृदयानंद राम के बेटे मरजीत कुमार और अगियांव क्षेत्र के खननी कलां गांव निवासी रविंद्र राम के बेटे मनीष कुमार भी 29 जनवरी को कंबोडिया पहुंचे थे। मनीष और मरजीत रिश्ते में जीजा-साला बताए जाते हैं।
दलाल ने दिया था नौकरी का लालच
परिजनों का कहना है कि महाराष्ट्र के रहने वाले संतोष चौपगार उर्फ लक्की नाम के एक दलाल ने युवकों को होटल में फूड पैकिंग या वेटर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। साथ ही हर महीने 75 से 80 हजार रुपये वेतन मिलने का लालच भी दिया गया था।
इसी भरोसे में युवकों को टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया भेज दिया गया। लेकिन वहां पहुंचने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि युवकों पर साइबर ठगी से जुड़े काम करने का दबाव बनाया जाने लगा।
काम करने से मना किया तो पासपोर्ट जब्त
परिजनों के अनुसार जब युवकों ने गलत काम करने से इनकार किया तो उनके पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिए गए। इसके बाद उन्हें कहीं बंद कर दिया गया। परिवार को आशंका है कि युवकों को जबरन साइबर ठगी के गिरोह में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
गोविंद सिंह के भाई अखिलेश कुमार ने बताया कि 19 फरवरी को एक पाकिस्तानी नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने बताया कि गोविंद और उसके साथी वहां के एक जेलनुमा स्थान में बंद हैं।
छह लाख रुपये की मांग
परिजनों के अनुसार पहले दो लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में यह रकम बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दी गई। परिवार के लोग इतने पैसे देने में असमर्थ हैं और लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
दो युवक पैसे देकर लौटे, बताई सच्चाई
गांव के ही राजेश कुमार और आकाश कुमार भी इसी तरह फूड पैकिंग के काम के बहाने कंबोडिया गए थे। वहां की स्थिति देखकर दोनों ने किसी तरह अपने घर से 17-17 हजार रुपये मंगवाकर दलालों को दिए और वापस अपने गांव लौट आए। गांव पहुंचकर उन्होंने वहां फंसे बाकी युवकों की स्थिति के बारे में बताया, जिसके बाद परिवार के लोगों की चिंता और बढ़ गई।
सांसदों ने विदेश मंत्री से लगाई गुहार
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह और आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने भारत के विदेश मंत्री को पत्र लिखकर कंबोडिया में फंसे युवकों को जल्द सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।वहीं परिजन भी स्थानीय प्रशासन से लेकर विदेश मंत्रालय तक मदद की गुहार लगा रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि सरकार जल्द हस्तक्षेप करेगी और उनके बेटे सुरक्षित भारत लौट सकेंगे।