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30-Mar-2025 08:56 AM
IAS Sujata Karthikeyan : दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज की टॉपर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में पोस्ट ग्रैजुएट, और IAS अकादमी की गोल्ड मेडलिस्ट सुजाता ने अपनी काबिलियत से हर कदम पर इतिहास रचा। 2000 बैच की इस IAS अधिकारी ने न सिर्फ ओडिशा के नक्सल प्रभावित इलाकों में बदलाव की बयार बहाई, बल्कि शिक्षा और खेल जैसे क्षेत्रों में भी नीतिगत फैसलों से लाखों जिंदगियों को रोशनी दी। लेकिन हाल ही में उन्होंने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर सबको चौंका दिया। आखिर कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन, और क्या है उनकी कहानी? आइए, जानते हैं।
पढ़ाई से प्रशासन तक का सफर
सुजाता की जिंदगी उपलब्धियों से भरी रही है। दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में टॉपर रहने के बाद उन्होंने JNU से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में मास्टर्स किया। इसके बाद IAS की ट्रेनिंग के दौरान भी वे गोल्ड मेडल हासिल करने में कामयाब रहीं। 2000 में ओडिशा कैडर की IAS बनने के बाद उन्होंने कटक जिले की पहली महिला कलेक्टर बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। लेकिन उनकी असली परीक्षा तब शुरू हुई, जब उन्हें माओवादी प्रभावित सुंदरगढ़ जिले का कलेक्टर बनाया गया।
बदलाव की मिसाल
सुंदरगढ़ में कलेक्टर रहते हुए सुजाता ने कई ऐसे कदम उठाए, जिन्होंने वहां की तस्वीर बदल दी। उन्होंने हाईस्कूल पास करने वाली लड़कियों के लिए साइकिल योजना शुरू की, जिसका असर पूरे ओडिशा में दिखा। इस पहल से स्कूलों में लड़कियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ। इसके अलावा, मिड-डे मील में अंडे को शामिल करवाकर उन्होंने बच्चों के पोषण का ख्याल रखा। नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों को हिंसा से दूर रखने के लिए उन्होंने खेलों को बढ़ावा दिया। फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों को लोकप्रिय बनाया और हॉकी खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल तक बनवाए। इन कोशिशों से न सिर्फ युवाओं को नई दिशा मिली, बल्कि माओवाद का प्रभाव भी कम हुआ।
मिशन शक्ति और महिला सशक्तिकरण
सुजाता कार्तिकेयन को ओडिशा में नवीन पटनायक सरकार के मिशन शक्ति कार्यक्रम से जोड़कर भी याद किया जाता है। इस पहल के तहत उन्होंने 70 लाख महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उनकी मेहनत रंग लाई। इसके अलावा, पांच महीने तक कल्चरल सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए उन्होंने ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर को भी संवारा। लेकिन उनकी यह यात्रा तब विवादों में घिर गई, जब 2024 के आम चुनाव से पहले बीजेपी ने उन पर बीजेडी के एजेंट होने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने उनका ट्रांसफर कर दिया, जिसके बाद उनकी छवि पर सवाल उठने लगे।
बीजेपी सरकार से तकरार और VRS का फैसला
सुजाता के पति वीके पांडियन, जो नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी रहे, उन्होंने भी IAS से VRS लिया था और बीजेडी में शामिल हो गए थे। लेकिन 2024 में बीजेडी की हार के बाद ओडिशा में बीजेपी की सरकार बनी। इसके ठीक बाद सुजाता ने अपनी बेटी की पढ़ाई का हवाला देकर छह महीने की छुट्टी ले ली। नवंबर 2024 में छुट्टी खत्म होने के बाद उन्होंने इसे बढ़ाने की गुजारिश की, लेकिन बीजेपी सरकार ने इसे ठुकरा दिया, जिसके बाद सुजाता ने निजी कारणों से VRS के लिए आवेदन किया था, जिसे अब केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। वीके पांडियन पहले ही राजनीति से संन्यास ले चुके थे, और अब सुजाता का यह कदम भी चर्चा का विषय बन गया है।