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भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व पुलिसकर्मी दोषी करार, निगरानी कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा

Bihar News: पटना की विशेष निगरानी अदालत ने 2011 के रिश्वत मामले में तत्कालीन बिहटा थाना के सहायक अवर निरीक्षक बद्री राम को दोषी करार देते हुए तीन साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

Bihar News
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। वर्ष 2011 के रिश्वत मामले में विशेष निगरानी कोर्ट ने  तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक (ASI)  बद्री राम को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष निगरानी कोर्ट के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने यह फैसला सुनाया।



दोषी बद्री राम उस समय पटना जिले के बिहटा थाना में सहायक अवर निरीक्षक के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 60/2011 और विशेष वाद संख्या 44/2011 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।



मामला पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन निवासी किशोर कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोप था कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को छुड़ाने के लिए मोटरयान निरीक्षक के पास जांच के लिए अनुरोध पत्र भेजने के एवज में बद्री राम ने परिवादी से 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। निगरानी विभाग की कार्रवाई में आरोपी को 3 सितंबर 2011 को 13 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।



मामले की जांच तत्कालीन अनुसंधानकर्ता और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस निरीक्षक महेन्द्र कुमार सिन्हा ने की। जांच पूरी होने के बाद समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से मामले में कुल 10 गवाहों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से प्रभारी विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना किशोर कुमार सिंह ने मामले में प्रभावी पैरवी की।



अदालत ने बद्री राम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 13 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी उन्हें तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 13 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर तीन महीने के साधारण कारावास का प्रावधान है। अदालत ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है।



निगरानी विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक कुल 20 भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। वर्तमान मामले में दोषसिद्धि की कार्रवाई विशेष न्यायालय निगरानी, पटना के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने की।



निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है। वर्ष 2025 में विशेष न्यायालय निगरानी द्वारा कुल 30 भ्रष्टाचार के मामलों में सजा सुनाई गई थी। निगरानी विभाग के अनुसार, वर्ष 2000 से 2024 तक के आंकड़ों की तुलना में, झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद यह अवधि सजा की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण रही है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता