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मद्य निषेध में बड़ा खेल ! शराब कांड के आरोपी 'उत्पाद अधीक्षक' को बचाने में बेनकाब हुई महिला संचालन पदाधिकारी, सुपरिटेंडेंट 'पाठक' के खिलाफ जांच अधूरी और दे दी क्लीन चिट, अब होगी दोबारा जांच

बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक को क्लीन चिट देने वाली विभागीय जांच रिपोर्ट पर मद्य निषेध विभाग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शराब माफियाओं से सांठगांठ के आरोपों की दोबारा जांच के लिए नया संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।

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उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक की फाइल तस्वीर
© Google
Viveka Nand
7 मिनट

 Bihar News: शराब माफियाओं के सांठगांठ कर यूपी से बिहार में शराब की सप्लाई कराने वाले उत्पाद अधीक्षक को जांच पदाधिकारी ने बचा लिया. मद्य निषेध विभाग ने जिस महिला अधिकारी को विभागीय जांच पूर्ण कर रिपोर्ट देने को कहा था, उन्होंने अधूरी जांच कर आरोपी अधिकारी को क्लिनचिट दे दिया . संचालन पदाधिकारी ने आरोपी उत्पाद अधीक्षक को पाक साफ बताते हुए रिपोर्ट विभाग को सौंप दिया. जबकि सबसे बड़े आरोप, उससे संबंधित प्रमाण की जांच ही नहीं की. अधूरी जांच और पाक-साफ बताने का रिपोर्ट देकर महिला अधिकारी (संचालन पदाधिकारी) सेवानिवृत हो गईं. विभाग ने पाया है कि उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ जांच अधूरी है. संचालन पदाधिकारी ने तय मापदंड के खिलाफ जाकर जांच की है. लिहाजा फिर से विभागीय जांच कराने का निर्णय लिया गया है.

बक्सर एसपी ने उत्पाद अधीक्षक की खोली थी पोल 

बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक (वर्तमान में जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक) के खिलाफ बक्सर के जिलाधिकारी ने 21 जून 2025 को विभाग को रिपोर्ट किया था. जिसमें जानकारी दी गई थी, इन्हें बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया है. साथ ही पुलिस अधीक्षक, बक्सर के प्रतिवेदन के अनुसार कांड के पर्यवेक्षण में दिलीप पाठक के खिलाफ प्रमाण मिले, जिस आधार पर इन्हें बक्सर के औद्योगिक थाना कांड में अप्राथमिक अभियुक्त बनाया गया. इस आरोप में मद्य निषेध विभाग ने 20 अगस्त को विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश जारी किया गया. रेणू कुमारी सिन्हा, उपायुक्त मद्यनिषेध को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था.

आरोपी को बचाया...अप्रमाणित रिपोर्ट देकर सेवानिवृत हो गई रेणू सिन्हा.... 

मद्य निषेध विभाग ने आगे कहा है कि संचालन पदाधिकारी रेणु कुमारी सिन्हा जो वर्तमान में सेवानिवृत हो गई हैं, इन्होंने 27 फरवरी 2026 को अंतिम जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया. जिसमें तथ्यों, गवाहों एवं तत्समय संयुक्त आयुक्त मद्यनिषेध के जाँच के आलोक में बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक के खिलाफ अनाधिकृत उपस्थिति एवं शराब तस्करों से सांठ-गांठ कर शराब परिवहन वाले वाहन की जांच किये बिना चेकपोस्ट से जाने देने का आरोप अप्रमाणित पाया. 

माफियाओं से सांठगांठ करने वाले उत्पाद अधीक्षक को बचाने की कोशिश 

संचालन पदाधिकारी ने शराब माफिया से सांठगांठ करने के आरोपी अधीक्षक दिलीप पाठक को क्लिनचिट देने वाली रिपोर्ट की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि आरोप पत्र के चौथे भाग के 'ख' में अंकित साक्ष्य जिनकी रिपोर्ट के आधार पर आरोप पत्र गठन किया गया था, उसका नियमानुसार परीक्षण /प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया.

संचालन पदाधिकारी ने आरोपों की नहीं की सघन जांच 

संचालन पदाधिकारी (रेणू कुमारी सिन्हा) द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में SDPO डुमरॉव द्वारा केस से संबंधित साक्ष्य 23 फरवरी 2026 तक उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गयी है. यह कहकर जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित कर दिया गया. मद्य निषेध विभाग ने समीक्षा में पाया कि, जिस प्रतिवेदन पर दिलीप पाठक के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया था, उसकी गहन समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा नहीं की गई। 

संचालन पदाधिकारी ने मापदंड के खिलाफ जाकर किया काम 

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के प्रतिवेदन में उल्लेख किए गए अप्राथमिकी अभियुक्त हरेन्द्र सिंह के मोबाईल में पाये गये ऑडियो क्लिप जिसमें शराब की तस्करी / गाड़ी पार कराने के संबंध में दिलीप कुमार पाठक, तत्कालीन अधीक्षक बक्सर (वर्तमान में जहानाबाद) का जिक्र किया गया है, एवं फोटो का सत्यापन भी नहीं किया गया है। विभाग ने यह भी पाया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट संचालन पदाधिकारी के जाँच के लिए निर्धारित माप दंडों के खिलाफ है. ऐसे में इस विभागीय कार्यवाही में उन बिन्दुओं पर आगे की जाँच (Further Inquiry) की जरूरत है. 

सविता कुमारी को बनाया गया नया संचालन पदाधिकारी 

रेणू कुमारी सिन्हा, उपायुक्त मद्यनिषेध सह-संचालन पदाधिकारी, जिन्होंने दिलीप कुमार पाठक को बचाया, 28 फरवरी 2026 को सेवानिवृत हो चुकी हैं. ऐसे में शराब माफिया से गठजोड़ कर कमाई करने के आरोपी बक्सर के तत्कालीन व वर्तमान में जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक के खिलाफ Further Inquiry के लिए बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व विभाग में ओएसडी डॉ० सविता कुमारी को संचालन पदाधिकारी बनाया गया है. वहीं अशरफ जमाल, अधीक्षक मद्यनिषेध, बक्सर को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया है. जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक से अपेक्षा की गई है कि वे अपने बचाव बयान के संबंध में अपना पक्ष संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखें. मद्य निषेध विभाग ने 1 जून 2026 को यह संकल्प जारी किया है. 

मामले कैसे हुआ था उजागर?

बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक का शराब माफियाओं से सांठगांठ के इस राज़ से पर्दा उस वक्त उठा, जब 21 जून 2024 को बक्सर औद्योगिक थाना की पुलिस ने वीर कुंवर सिंह सेतु से यूपी के रास्ते बिहार में प्रवेश कर रही तीन गाड़ियों को गुप्त सूचना के आधार पर धर दबोचा, जिसमें शराब माफियाओं के साथ साथ होमगार्ड के दो जवान भी पुलिस के हत्थे चढ़े. इनसे पूछताछ के दौरान एक ऐसे शराब माफिया का नाम सामने आया, जो 2022 में बक्सर जिले के मुरार थाना क्षेत्र के अंमसारी गांव में हुए जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रहा था. उस जहरीली शराब कांड में पांच लोगों की मौत हो चुकी थी. हालांकि जब पुलिस ने जब उस आरोपी मुन्ना सिंह से पूछताछ की तो उसने उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक की संलिप्तता बताते हुए कहा कि 2016 से ही दिलीप पाठक हम लोगों से मोटी रकम लेकर यूपी से बिहार में शराब की बड़ी-बड़ी खेप पहुंचाते थे. 

तब बक्सर एसपी ने क्य़ा कहा था.....

बता दें, तत्कालीन  उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक लंबे समय से बक्सर में पदस्थापित रहे. 2016 में बक्सर उत्पाद विभाग में निरीक्षक के पद पर तैनात थे, बक्सर जिले में तीसरी बार में उनकी पोस्टिंग उत्पाद अधीक्षक के तौर पर हुई थी. इस मामले में पुलिस के बारिकी से अनुसंधान कर करने पर पता चला कि उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक की शराब माफियाओं के सांठगांठ है, जिसके पुलिस को पुख्ता सबूत भी मिले. इस पुख्ता सबूत के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया था. 

तब पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया था कि 21 जून को औद्योगिक थाना क्षेत्र अंतर्गत NH 922 पर शराब लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई थीं, जिसमें कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था. इनसे पूछताछ के दौरान कई अहम पुख्ता सबूत मिले. इस आधार पर उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश निर्गत किया गया.

मद्य निषेध विभाग ने महिला संचालन पदाधिकारी की रिपोर्ट को किय़ा खारिज

 मद्य निषेध में बड़ा खेल ! शराब कांड के आरोपी 'उत्पाद अधीक्षक' को बचाने में बेनकाब हुई महिला संचालन पदाधिकारी, सुपरिटेंडेंट 'पाठक' के खिलाफ जांच अधूरी और दे दी क्लीन चिट, अब होगी दोबारा जांच

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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता