DESK: देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। आयोग फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में जुटा है। इसी बीच सबसे बड़े कर्मचारी संगठन नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है। यदि इसे स्वीकार किया जाता है, तो लाखों कर्मचारियों की वेतन संरचना और प्रमोशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पे-लेवल मर्ज करने का प्रस्ताव
NC-JCM ने मौजूदा पे मैट्रिक्स को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है। संगठन का प्रस्ताव है कि जिन पे-लेवल में वेतन का अंतर बहुत कम है, उन्हें आपस में मर्ज कर दिया जाए। संगठन ने निम्नलिखित पे-लेवल को एकीकृत करने का सुझाव दिया है:
लेवल-2 और लेवल-3
लेवल-4 और लेवल-5
लेवल-7 और लेवल-8
लेवल-9 और लेवल-10
संगठन का तर्क है कि इन स्तरों पर कार्य की प्रकृति और वेतन में बहुत अधिक अंतर नहीं है। इसके बावजूद अलग-अलग पे-लेवल होने से कर्मचारियों के बीच असमानता की भावना पैदा होती है और प्रमोशन की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। यदि इन स्तरों को एकीकृत किया जाता है तो वेतन व्यवस्था अधिक सरल, न्यायसंगत और पारदर्शी हो सकती है।
लेवल-5 कर्मचारियों के लिए विशेष मांग
NC-JCM ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा है कि मौजूदा लेवल-5 के कर्मचारियों को एक विशेष प्रावधान के तहत सीधे लेवल-6 में अपग्रेड किया जाए। संगठन का कहना है कि केंद्रीय सचिवालय, रेलवे, डाक विभाग और रक्षा विभाग सहित कई सरकारी संस्थानों में बड़ी संख्या में ग्रुप-सी कर्मचारी वर्षों से लेवल-5 में ही कार्यरत हैं। इससे उनके प्रमोशन के अवसर सीमित हो जाते हैं और करियर ग्रोथ प्रभावित होती है। लेवल-6 में अपग्रेड किए जाने से इस समस्या का समाधान हो सकता है।
न्यूनतम वेतन और वार्षिक बढ़ोतरी बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठन ने सरकार के समक्ष कई अन्य महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे हैं। इनमें प्रमुख मांगें हैं—
न्यूनतम बेसिक वेतन 69,000 रुपये किया जाए।
मौजूदा 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया जाए।
महंगाई के अनुरूप नया वेतन निर्धारण मॉडल लागू किया जाए।
नई वेतन संरचना के अनुसार पेंशन व्यवस्था में भी संशोधन किया जाए। संगठन का कहना है कि इन बदलावों से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और महंगाई का प्रभाव कम होगा।
अभी केवल सुझाव, अंतिम फैसला बाकी
गौरतलब है कि ये सभी मांगें फिलहाल कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए गए सुझाव हैं। इन पर अंतिम निर्णय 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। 8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था। आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सरकारी विभागों से सुझाव एवं आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। माना जा रहा है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच सरकार को सौंप सकता है।
यदि सरकार आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देती है, तो नई वेतन संरचना लागू होने में दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है। ऐसे में कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ 2029 या 2030 तक मिलने की संभावना है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई है, क्योंकि इन फैसलों का असर देश के करीब एक करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है।





